Haldwani: एसटीएच में दूरबीन तकनीक से दो जटिल घुटना सर्जरी सफल, मरीजों को मिला नया जीवन

खबर शेयर करें

हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के अधीन संचालित डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में अत्याधुनिक ऑर्थोस्कोपी (दूरबीन विधि) तकनीक के जरिए दो जटिल घुटना सर्जरियां सफलतापूर्वक की गई हैं। निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च होने वाले इन ऑपरेशनों को सरकारी अस्पताल में कम लागत पर सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सकों ने मरीजों को बड़ी राहत दी है।

अस्पताल के अस्थि रोग विभाग द्वारा किए गए इन सफल ऑपरेशनों ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के मामले में एसटीएच लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

पहले मामले में बागेश्वर निवासी 36 वर्षीय चन्द्र प्रकाश दुर्घटनावश गड्ढे में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे में उनके दाहिने घुटने का एसीएल (एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट) क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण उन्हें चलने-फिरने में काफी परेशानी होने लगी। उपचार के लिए एसटीएच पहुंचने पर जांच में लिगामेंट फटने की पुष्टि हुई।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: अब स्कूलों में पढ़ाई जाएगी श्रीमद् भगवत गीता, सीएम धामी ने दिए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के निर्देश

इसके बाद अस्थि रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. गणेश सिंह के निर्देशन में डॉ. गौरव जिंदल ने ऑर्थोस्कोपी तकनीक के माध्यम से दूरबीन विधि से सफल सर्जरी कर क्षतिग्रस्त लिगामेंट का पुनर्निर्माण किया। ऑपरेशन के बाद मरीज स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुका है।

दूसरे मामले में हल्द्वानी निवासी 18 वर्षीय अकरम अली सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। दुर्घटना के बाद उनके दाहिने घुटने में तेज दर्द और सूजन की शिकायत हुई। अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद जांच में एसीएल एवल्शन फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। यह ऐसी गंभीर चोट होती है जिसमें एसीएल लिगामेंट अपने जुड़ाव वाले स्थान से हड्डी का एक हिस्सा खींचकर अलग कर देता है।

यह भी पढ़ें 👉  दिल्ली में ब्लास्ट के बाद नैनीताल जिले में रेड अलर्ट, पुलिस ने शुरू की सघन चेकिंग

प्रो. डॉ. गणेश सिंह के निर्देशन में डॉ. गौरव जिंदल ने दूरबीन विधि से ऑपरेशन कर हड्डी के अलग हुए हिस्से को पुनः उसकी मूल स्थिति में स्थापित कर फिक्स किया। सफल सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

डॉ. गौरव जिंदल ने बताया कि ऑर्थोस्कोपी तकनीक से बिना बड़े चीरे के घुटने की जटिल सर्जरी की जाती है, जिससे मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी भी तेजी से होती है। उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों में ऐसी सर्जरियों पर सामान्यतः डेढ़ से दो लाख रुपये तक का खर्च आता है, जबकि एसटीएच में यह सुविधा बेहद कम लागत पर उपलब्ध कराई जा रही है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तरकाशी आपदा: सात दिन बाद भी हर्षिल-धराली का संपर्क टूटा, पैदल सफर ही सहारा

राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जी.एस. तितियाल ने इन सफल सर्जरियों पर अस्थि रोग विभाग और चिकित्सकों को बधाई देते हुए कहा कि एसटीएच आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण जोशी ने कहा कि अस्पताल में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं, जिससे प्रदेश के मरीजों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं अपने ही राज्य में उपलब्ध हो रही हैं।

ADVERTISEMENTS

You cannot copy content of this page