वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि यदि उनकी सरकार ईरान के साथ कोई समझौता करती है तो वह “अच्छा और सही समझौता” होगा। उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Barack Obama के दौर में हुए परमाणु समझौते की आलोचना करते हुए दावा किया कि उस समझौते ने ईरान को आर्थिक फायदा दिया और उसे परमाणु क्षमता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला।
ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ऐसी किसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगी, जिससे अमेरिका की सुरक्षा कमजोर हो। उनके अनुसार उनकी प्राथमिकता स्पष्ट है—ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और ऐसा समझौता तैयार करना जो अमेरिकी हितों और वैश्विक स्थिरता दोनों को ध्यान में रखे। हाल के महीनों में भी ट्रंप कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के साथ संभावित समझौता अभी अंतिम रूप में नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि बातचीत जारी है और अभी कई बिंदुओं पर चर्चा चल रही है। ट्रंप के मुताबिक अभी तक डील के सभी पहलू तय नहीं हुए हैं, लेकिन कुछ राजनीतिक विरोधी पहले से इसकी आलोचना करने लगे हैं।
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आ रहे हैं। कुछ अमेरिकी रिपोर्टों में कहा गया कि संभावित समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है, जबकि ईरानी पक्ष ने कुछ अहम दावों पर असहमति जताई है। उदाहरण के लिए, ईरान की ओर से यह कहा गया कि उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को सौंपने पर अभी कोई सहमति नहीं बनी है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से वैश्विक राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देशों को आशंका रही है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर सकता है, जबकि Iran लगातार अपने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता रहा है। ऐसे में यदि नई डील आगे बढ़ती है, तो उसका असर पश्चिम एशिया की भू-राजनीति, वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।

