हल्द्वानी। उत्तराखंड में टैक्स चोरी रोकने के दावों की सच्चाई अब सामने आने लगी है। कुमाऊं मंडल के रुद्रपुर, काशीपुर, किच्छा और हल्द्वानी में ट्रांसपोर्ट कारोबार की आड़ में टैक्स चोरी का संगठित नेटवर्क खुलेआम सक्रिय है। यह स्थिति तब है, जब इस पर रोक लगाने की जिम्मेदारी उन्हीं विभागों के पास है, जिनकी भूमिका पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह खेल बिना मजबूत अंदरूनी तालमेल के संभव नहीं है। ट्रकों की आवाजाही, रूट और चेकिंग से बचने की रणनीति पहले से तय रहती है। आरोप है कि कार्रवाई से पहले ही नेटवर्क को अंदर से सूचना मिल जाती है, जिससे पूरा सिस्टम बाईपास कर दिया जाता है।
विभागीय चर्चाओं में यह भी सामने आ रहा है कि कुछ संवेदनशील पदों पर तैनात अधिकारी कथित तौर पर संरक्षण में काम कर रहे हैं। वहीं, नियमों के तहत काम करने वाले अधिकारियों को हाशिए पर डाल दिया जाता है, जिससे विभाग के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।
इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद विभाग में हलचल जरूर तेज हुई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। सूत्र बताते हैं कि कुछ अधिकारियों पर दबाव बनाकर स्थिति संभालने की कोशिश हो रही है, जबकि विवादों में घिरे कथित ‘मुख्य चेहरे’ अब भी सुरक्षित हैं।
चर्चा यह भी है कि जल्द ही विभाग में बड़े स्तर पर तबादले हो सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल फेरबदल से व्यवस्था सुधरेगी या फिर जड़ में बैठे तंत्र पर भी कार्रवाई होगी।
यह मामला अब सिर्फ टैक्स चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इससे सरकारी राजस्व के साथ-साथ सिस्टम पर जनता का भरोसा भी कमजोर हो सकता है।

