टैक्स चोरी का खेल: ‘कच्चे माल’ के लिए गोदाम बने सेफ हाउस, रातों-रात खप रहा लाखों का माल

खबर शेयर करें

हल्द्वानी/रुद्रपुर। कुमाऊं मंडल के रुद्रपुर, काशीपुर, किच्छा और हल्द्वानी में कथित ट्रांसपोर्टों की आड़ में चल रहा टैक्स चोरी का खेल किसी से छिपा नहीं, बल्कि खुलेआम संचालित हो रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कथित ट्रांसपोर्टरों के गोदाम इस अवैध नेटवर्क के सबसे सुरक्षित अड्डे बन चुके हैं। कई ट्रांसपोर्टरों ने शहर से बाहर भी गोदाम बना रखे हैं, ताकि नजरों से दूर टैक्स चोरी का माल आसानी से उतारकर ठिकानों तक पहुंचाया जा सके। बाहरी राज्यों से आने वाला लाखों रुपये का ‘कच्चा माल’ यहां बिना किसी डर के उतारा जा रहा है और तेजी से बाजार में खपा दिया जाता है।

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली, मुरादाबाद और उत्तर प्रदेश से बंद बॉडी ट्रकों के जरिये टैक्स चोरी का माल रोजाना उत्तराखंड पहुंच रहा है। टैक्स चोरी के माल के लिए बरेली को सबसे बड़ी मंडी माना जाता है, जहां से भारी मात्रा में यह माल भेजा जाता है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड के इस जिले में अपात्र राशन कार्डधारकों पर गिरी गाज, एक हजार यूनिटें निरस्त

ट्रांसपोर्टरों की भाषा में टैक्स चोरी कर लाए जाने वाले ट्रकों को ‘कच्चे की गाड़ी’ कहा जाता है। ये गाड़ियां सीधे चिन्हित गोदामों तक पहुंचती हैं, जहां माल उतरते ही तुरंत अलग-अलग ठिकानों पर भेज दिया जाता है, ताकि कोई सुराग न बचे। पूरी प्रक्रिया इतनी तेज और सुनियोजित होती है कि जांच एजेंसियां अक्सर खाली हाथ रह जाती हैं।

यह भी पढ़ें 👉  हादसा: सैलरी कटौती और बोनस न मिलने से नाराज चालक ने जानबूझकर बस में लगाई आग, चार कर्मचारियों की मौत

वहीं दूसरी ओर, वैध बिल और टैक्स के साथ आने वाला माल, जिसे ‘पक्के की गाड़ी’ कहा जाता है, उसे जानबूझकर गोदामों में रोककर रखा जाता है और धीरे-धीरे बाजार में उतारा जाता है। यह रणनीति कागजों में सब कुछ सही दिखाने और असली गतिविधियों पर पर्दा डालने के लिए अपनाई जाती है। सूत्र बताते हैं कि अब कई कथित ट्रांसपोर्टों में दिन के बजाय रात के समय टैक्स चोरी का माल गोदामों में उतारा जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सब बिना सिस्टम की जानकारी के संभव है? लंबे समय से चल रहे इस खेल पर जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई संदेह खड़े कर रही है और इससे बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई जा रही है। कार्रवाई के नाम पर कभी-कभार होने वाली छापेमारी के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आता।

यह भी पढ़ें 👉  Uttarakhand: विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई...फायर एनओसी के नाम पर 20 हजार रिश्वत लेते लीडिंग फायरमैन गिरफ्तार

इस पूरे नेटवर्क से जहां सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं ईमानदारी से व्यापार करने वाले व्यापारी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब अवैध माल खुलेआम बाजार में उपलब्ध हो, तो वैध कारोबार करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

You cannot copy content of this page