पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली पर PM शहबाज़ शरीफ की खुली स्वीकारोक्ति, कहा- कर्ज लेने में चुकानी पड़ती है ‘इज्जत’ की कीमत

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नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने देश की बदहाल अर्थव्यवस्था और बढ़ते कर्ज को लेकर एक कड़वी सच्चाई दुनिया के सामने रखी है। उन्होंने स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कर्ज मांगने से न केवल देश का सिर झुकता है, बल्कि इसकी भारी कीमत ‘इज्जत’ के रूप में चुकानी पड़ती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान पर प्रति व्यक्ति कर्ज का बोझ 3.33 लाख रुपये से अधिक पहुंच चुका है, जो देश की चरमराती आर्थिक स्थिति को उजागर करता है।

Debt Comes With Humiliation: सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ यह स्वीकार करते नजर आ रहे हैं कि कर्ज दिलाने के दौरान उन्हें कई बार अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आर्थिक मदद दिलाने के लिए उन्हें कई ऐसे समझौते करने पड़े, जिन्हें वे दिल से स्वीकार नहीं करना चाहते थे, लेकिन हालात ने उन्हें मजबूर कर दिया।

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वीडियो में शहबाज़ शरीफ कर्ज देने और लेने वाले देशों के बीच के फर्क को भी साफ शब्दों में बयान करते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार कर्ज देने वाले देश ऐसी शर्तें थोप देते हैं, जिन्हें मानने की उनकी कोई इच्छा नहीं होती, लेकिन मजबूरी में उन्हें स्वीकार करना पड़ता है। हालांकि यह वीडियो कब और कहां रिकॉर्ड किया गया, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

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प्रधानमंत्री ने बताया कि वे और फील्ड मार्शल कई देशों के दौरे पर गए और उनसे कहा कि पाकिस्तान इस समय आईएमएफ प्रोग्राम के तहत है और उसे बाहरी वित्तीय सहायता की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा, “हमने उनसे कहा कि आप हमें इतने बिलियन डॉलर दे दें। उन्होंने मना नहीं किया, लेकिन कर्ज लेने वाले का सिर हमेशा झुका रहता है।”

गौरतलब है कि पाकिस्तान लंबे समय से भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। दिसंबर 2025 तक देश का कुल कर्ज बढ़कर 52.366 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। संसद में पेश की गई राजकोषीय नीति रिपोर्ट के अनुसार, हर पाकिस्तानी नागरिक पर कर्ज का बोझ सालाना 13 प्रतिशत बढ़कर 3,33,000 रुपये हो गया है। इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 2,94,098 रुपये था।

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कर्ज में डूबे पाकिस्तान की यह स्वीकारोक्ति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की आर्थिक कमजोरी को उजागर करती है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ का बयान इस बात का साफ संकेत है कि पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और उसकी विदेशी कर्ज पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है।