ऑनलाइन सट्टेबाजी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों समेत गूगल-एप्पल को नोटिस

खबर शेयर करें

नई दिल्ली। ऑनलाइन सट्टेबाजी पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी राज्यों के साथ गूगल इंडिया और एप्पल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों से जवाब तलब किया है और मामले को जनहित से जुड़ा बताते हुए अगली सुनवाई में ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स पर अंतरिम रोक लगाने पर विचार की बात कही है।

यह याचिका ईसाई धर्म प्रचारक के. ए. पॉल की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स जुए की श्रेणी में आते हैं और युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं। याचिका में दावा किया गया है कि सिर्फ तेलंगाना में ही ऐसे ऐप्स की लत के चलते 1,023 लोगों ने आत्महत्या कर ली।

यह भी पढ़ें 👉  भीमताल में मिला बर्ड फ्लू का पहला मामला, पशुपालन विभाग अलर्ट

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि बॉलीवुड और टॉलीवुड के लगभग 25 अभिनेता तथा कई सेलिब्रिटी खिलाड़ी इन ऐप्स का प्रचार कर रहे हैं, जिससे युवाओं को इनकी ओर आकर्षित किया जा रहा है और समाज में नकारात्मक असर पड़ रहा है।

यह भी पढ़ें 👉  नशे का खौफनाक अंजाम: पत्नी ने पति पर कुल्हाड़ी से किए 26 वार, चार साल का मासूम बना गवाह

ईडी की जांच में सामने आए बड़े खुलासे

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी सक्रिय हो गया है। ईडी ने 28 जुलाई को गूगल और मेटा को समन जारी कर दिल्ली कार्यालय में पूछताछ के लिए तलब किया था। इससे पहले भी 21 जुलाई को दोनों कंपनियों को समन भेजा गया था, लेकिन वे पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए।

ईडी का आरोप है कि गूगल और मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म्स पर इन अवैध सट्टेबाजी ऐप्स के विज्ञापन चलाकर उनकी पहुंच को बढ़ावा दिया। जांच में यह भी सामने आया है कि ये ऐप्स ‘स्किल-बेस्ड गेमिंग’ के नाम पर सट्टेबाजी को बढ़ावा दे रहे हैं और इनके जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की गई, जिसे हवाला चैनलों के माध्यम से छिपाया गया।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: यूपीसीएल के बिजलीघर होंगे साइबर सिक्योर! नियामक आयोग ने 31.85 करोड़ के अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट को सशर्त मंजूरी दी

सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स पर अंतरिम प्रतिबंध लगाने को लेकर अहम फैसला आ सकता है। अदालत की इस सख्ती को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

You cannot copy content of this page