ईरान का अमेरिका पर बड़ा हमला, खामेनेई बोले- ट्रंप के हस्ताक्षर बेकार…’युद्ध हुआ तो अमेरिका को नहीं भूलने वाला जवाब मिलेगा’

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तेहरान। मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका पर शांति समझौते (MoU) का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाओं ने साबित कर दिया है कि ट्रंप के हस्ताक्षर की कोई विश्वसनीयता नहीं है और अमेरिका अपने वादों पर कायम रहने वाला देश नहीं है।

देश के नाम जारी संदेश में खामेनेई ने कहा कि अमेरिका ने समझौते को तोड़कर अपना असली चेहरा दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। उनके मुताबिक यह अमेरिका के “झूठे, अविश्वसनीय और आक्रामक रवैये” का एक और प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि वाशिंगटन ने कूटनीतिक समझौते को नजरअंदाज कर एक बार फिर टकराव का रास्ता चुना है।

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‘युद्ध थोपा गया तो मिलेगा करारा जवाब’

ईरानी सर्वोच्च नेता ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वाशिंगटन ने सैन्य कार्रवाई और युद्ध भड़काने की कोशिशें जारी रखीं, तो उसे ऐसा जवाब मिलेगा जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान और उसका “प्रतिरोध मोर्चा” (Resistance Front) किसी भी आक्रमण का पूरी ताकत से जवाब देने के लिए तैयार है।

खामेनेई का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच 18 जून को हुए शांति समझौते के बावजूद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इस समझौते पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के लिए बातचीत करनी थी, लेकिन अब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर समझौता तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं।

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ईरान ने समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियां रोकीं

ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी (IRIB) को दिए इंटरव्यू में घोषणा की कि ईरान ने समझौते के तहत अपनी सभी जिम्मेदारियों का पालन रोक दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने समझौते के लगभग सभी वादों को तोड़ दिया या उन्हें निलंबित कर दिया है। गरीबाबादी ने कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं बची है और अब ईरान का पूरा ध्यान अपनी सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई पर केंद्रित है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी हमलों का ईरान पहले ही करारा जवाब दे चुका है और यदि अमेरिका ने तनाव बढ़ाना जारी रखा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

हवाई हमलों से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

पिछले एक सप्ताह के दौरान अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी हिस्सों में स्थित कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक बुनियादी ढांचों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ये कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई।

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इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरान की कार्रवाई के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया।

कुवैत और बहरीन ने रोके हवाई हमले

शनिवार को कुवैत और बहरीन ने दावा किया कि उनके हवाई रक्षा तंत्र ने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को समय रहते निष्क्रिय कर दिया। दोनों देशों ने कहा कि उनकी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और क्षेत्रीय हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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