न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा है। भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन आतंकी संगठनों को उसने तैयार किया और इस्तेमाल किया, वही अब उसके लिए ‘फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर’ बन चुके हैं। भारत के मुताबिक, आतंकवाद का यह नेटवर्क अब कथित तौर पर अपने पालने वालों के नियंत्रण से बाहर निकलकर पाकिस्तान को ही निशाना बना रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी राघू पुरी ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से खुद को आतंकवाद से लड़ने वाला देश और उसका पीड़ित बताता रहा है, लेकिन वह इस तथ्य को नजरअंदाज करता है कि उसकी सरकार ने जिन खतरनाक संगठनों को तैयार किया, बाद में वही उसके नियंत्रण से बाहर हो गए। उन्होंने कहा कि ये संगठन पहले पड़ोसी देशों में हिंसा फैलाते रहे और अब पाकिस्तान में भी हमले कर रहे हैं।
पुरी ने पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि देश में सक्रिय चरमपंथी संगठनों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा, “आप एक साथ दो विरोधी पक्षों का समर्थन नहीं कर सकते। हकीकत इस तरह काम नहीं करती।”
पाकिस्तान के बयान पर भारत का पलटवार
यूएन महासभा की छठी समिति की बैठक में पुरी पाकिस्तान के डिप्टी परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव उस्मान जादून की ओर से भारत पर की गई टिप्पणियों का जवाब दे रहे थे। संयुक्त राष्ट्र की छठी समिति कानूनी मामलों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करती है।
भारत ने इस दौरान पाकिस्तान के भीतर मौजूद राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी विरोधाभासों का भी उल्लेख किया। पुरी ने पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने माना है कि पंजाब के लिए खतरा केवल पड़ोसी देशों से नहीं, बल्कि पड़ोसी प्रांतों से भी है।
ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान के दावों को बताया दुष्प्रचार
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान के कथित जीत के दावों पर भी पलटवार किया। पुरी ने पाकिस्तान के नैरेटिव पर तंज कसते हुए कहा कि यदि बमबारी से क्षतिग्रस्त एयरफील्ड और गड्ढों से भरे रनवे पाकिस्तान को जीत के संकेत नजर आते हैं तो वह इसे अपनी जीत मानकर खुश हो सकता है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के परिणामों को लेकर पाकिस्तानी सेना के नैरेटिव को सही साबित करने की कोशिश कथित तौर पर राज्य प्रायोजित गलत सूचना और मनोवैज्ञानिक अभियान की पुरानी रणनीति का हिस्सा है।
पहलगाम हमले का भी उठाया मुद्दा
पुरी ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवादियों ने पीड़ितों को निशाना बनाने से पहले उनकी धार्मिक पहचान पूछी थी। उन्होंने कहा, “पहलगाम में पीड़ितों से उनकी राजनीतिक विचारधारा नहीं पूछी गई थी, उनसे उनका धर्म पूछा गया था।”
उन्होंने पाकिस्तान के उस रुख पर सवाल उठाया जिसमें वह धार्मिक नफरत के खिलाफ लड़ाई की बात करता है, जबकि भारत उस पर सीमा पार आतंकवाद के जरिए ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप लगाता रहा है।
पुरी ने कहा कि यदि पाकिस्तान कहानी गढ़ने, गलत सूचनाएं फैलाने और दुष्प्रचार करने के बजाय आतंकवाद से निपटने पर ध्यान देता तो स्थिति अलग होती।
मसूद अजहर को लेकर भी पाकिस्तान से सवाल
भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर का मुद्दा भी संयुक्त राष्ट्र में उठाया। पुरी ने सवाल किया कि यदि मीडिया मसूद अजहर तक पहुंच सकता है और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उससे प्रतिक्रिया हासिल कर सकता है, तो फिर पाकिस्तानी सरकार को उसके ठिकाने की जानकारी क्यों नहीं होगी।

