पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क: रसोई गैस आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने देश में रसोई गैस की आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश की तेल रिफाइनरियों को एलपीजी यानी रसोई गैस का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाए।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है और इसका अधिकांश हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते देश तक पहुंचता है। यही वजह है कि सरकार ने संभावित संकट को देखते हुए पहले से तैयारी शुरू कर दी है।

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सरकार ने तेल रिफाइनरियों से कहा है कि वे एलपीजी उत्पादन बढ़ाएं और अतिरिक्त गैस को घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था करें। साथ ही गैस वितरण कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि घरेलू जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में आम लोगों को रसोई गैस की कमी का सामना न करना पड़े।

इसी क्रम में घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग को लेकर भी नया प्रावधान लागू किया गया है। अब एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद अगले सिलेंडर के लिए कम से कम 25 दिन का अंतराल अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम जमाखोरी और घबराहट में एक साथ कई सिलेंडर बुक करने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए उठाया गया है।

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दरअसल भारत बड़ी मात्रा में एलपीजी और कच्चा तेल पश्चिम एशिया से आयात करता है। इन आपूर्तियों का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यदि क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो इस रास्ते से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है, जिससे आपूर्ति बाधित होने का जोखिम रहता है।

सरकार ने गैर-घरेलू एलपीजी आपूर्ति की भी समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार होटल, रेस्तरां और औद्योगिक इकाइयों को मिलने वाली गैस की खपत पर नजर रखी जा रही है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्थिति और बिगड़ती है तो घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए इन क्षेत्रों में आपूर्ति सीमित की जा सकती है। हालांकि अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक सेवाओं को गैस की आपूर्ति जारी रखी जाएगी।

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फिलहाल सरकार एलपीजी उत्पादन बढ़ाने, वितरण व्यवस्था को सख्त करने और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि रसोई गैस देश के करोड़ों परिवारों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी हुई है, इसलिए सरकार इस आपूर्ति को किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होने देना चाहती।

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