अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का भयावह चेहरा फिर आया सामने
ढाका। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। आए दिन सामने आ रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ताजा मामला सिलहट जिले के गोवाईघाट थाना क्षेत्र अंतर्गत नंदिरगांव संघ के बहोर गांव का है, जहां इस्लामिक कट्टरपंथियों ने एक हिंदू परिवार के घर पर हमला कर आग के हवाले कर दिया।
Hindu House Set on Fire in Sylhet: प्राप्त जानकारी के अनुसार, कट्टरपंथियों ने बहोर गांव में रहने वाले बीरेंद्र कुमार डे के घर को निशाना बनाया। हमलावरों ने घर में आग लगा दी, जो कुछ ही मिनटों में विकराल रूप लेती चली गई। आग इतनी भीषण थी कि पूरा मकान जलकर खाक हो गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि परिवार के सदस्य अपनी जान बचाने के लिए घर से बाहर निकलने को मजबूर हैं।
घर जलकर राख, परिवार बेघर
आगजनी की इस घटना में बीरेंद्र कुमार डे का पूरा घर नष्ट हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, हमले के दौरान इलाके में दहशत का माहौल बन गया। पीड़ित परिवार अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। घटना के बाद भी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि इस तरह की घटनाएं लगातार दोहराई जा रही हैं।
मानवाधिकार संगठन की गंभीर चिंता
ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा को लेकर गहरी चिंता जताई है। संगठन के मुताबिक, पिछले सात महीनों में 100 से अधिक अल्पसंख्यकों की मौत का दस्तावेजीकरण किया गया है।
HRCBM का कहना है कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि अल्पसंख्यकों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाए जाने का एक देशव्यापी पैटर्न बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, 6 जून 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच बांग्लादेश के सभी आठ डिवीजनों और कम से कम 45 जिलों में 116 अल्पसंख्यकों की मौत हुई है। इनमें लिंचिंग, सुनियोजित हत्याएं और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौतें शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठी आवाज
बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाए जाने का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गूंजने लगा है। इससे पहले ब्रिटेन की सांसद प्रीति पटेल, जो विदेश, कॉमनवेल्थ और विकास मामलों की शैडो सेक्रेटरी ऑफ स्टेट हैं, इस पर कड़ी नाराजगी जता चुकी हैं।
उन्होंने ब्रिटेन सरकार से अपील की थी कि वह अपने कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर बांग्लादेश में स्थिरता सुनिश्चित करे, ताकि धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा हो और हिंदू समुदाय खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।
बढ़ता डर, गहराता संकट
लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू समुदाय के बीच भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। सवाल यह है कि आखिर कब तक अल्पसंख्यक हिंसा का शिकार होते रहेंगे और क्या सरकार इन पर प्रभावी अंकुश लगा पाएगी?
