हल्द्वानी। संदिग्ध जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में नैनीताल जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। शिकायत की जांच के बाद जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की संस्तुति पर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. मनीषा कायथ का हल्द्वानी तहसील से जारी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है। तहसीलदार हल्द्वानी को प्रमाण पत्र जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि मामले में आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजे गए हैं।
मामला सितारगंज निवासी अनिल कुमार कंबोज की शिकायत से सामने आया। शिकायत में डॉ. मनीषा कायथ द्वारा हल्द्वानी तहसील से बनवाए गए अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठाए गए थे। शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच कराई।
जांच में सामने आया कि डॉ. मनीषा कायथ का मूल निवास हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में है। तहसीलदार कसौली ने उन्हें 11 अक्टूबर 1999 को हिमाचल प्रदेश की छिब्बे जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी किया था। इसके बाद विवाह के बाद उन्होंने हल्द्वानी तहसील से 22 जनवरी 2014 को उत्तराखंड की धोबी जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र संख्या 040201400069/266 प्राप्त किया।
इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उनका चयन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के पद पर हुआ। वर्तमान में डॉ. कायथ चंपावत जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा पर कार्यरत हैं।
मामले की सुनवाई और जांच के लिए 3 अगस्त 2026 को जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की बैठक हुई। बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन, सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी, जिला समाज कल्याण अधिकारी नैनीताल और जिला होम्योपैथिक अधिकारी चंपावत ने प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की समीक्षा की।
कमेटी ने मामले में सर्वोच्च न्यायालय के Ranjana Kumari Vs State of Uttaranchal (2013) और उत्तराखंड हाईकोर्ट के Smt. Anshu Sagar Vs State of Uttarakhand (2025) मामलों में दिए गए निर्णयों का भी परीक्षण किया। कमेटी के अनुसार संबंधित न्यायिक व्यवस्थाओं में यह स्पष्ट किया गया है कि अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ संबंधित व्यक्ति के मूल राज्य से जुड़े होने के आधार पर ही राज्य की सेवाओं में अनुमन्य है। केवल विवाह के बाद दूसरे राज्य में जाने के आधार पर वहां की अनुसूचित जाति की श्रेणी में आरक्षण का लाभ नहीं लिया जा सकता।
इसी आधार पर स्क्रूटनी कमेटी ने हल्द्वानी तहसील से जारी प्रमाण पत्र को निरस्त करने की संस्तुति की। जिलाधिकारी ने कमेटी की संस्तुति और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर 22 जनवरी 2014 को जारी जाति प्रमाण पत्र संख्या 040201400069/266 को निरस्त कर दिया।
जिलाधिकारी ने तहसीलदार हल्द्वानी को प्रमाण पत्र जब्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रकरण के निस्तारण के बाद संबंधित विभागों को अग्रिम कार्रवाई के लिए पत्र भेजे गए हैं। अब संबंधित विभागों की ओर से नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य सभी मामलों में पारदर्शिता बनाए रखते हुए नियमों और प्रचलित विधिक व्यवस्थाओं के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करना है। प्रशासन द्वारा किसी भी मामले में तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।
