हल्द्वानी। नैनीताल के जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी का शनिवार को अचानक निधन हो गया। एक मृतक आश्रित को बैंक चेक देने के लिए घर से निकलने की तैयारी कर रहे जोशी के साथ अचानक ऐसी घटना घटी, जिसने परिवार और आसपास के लोगों को स्तब्ध कर दिया। बाइक स्टार्ट करने के दौरान उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा और वह वहीं गिर पड़े। पत्नी और पड़ोसियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके आकस्मिक निधन की खबर मिलते ही पत्रकारिता जगत, सूचना विभाग, अधिकारियों-कर्मचारियों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।
शनिवार को गिरिजा शंकर जोशी अपने हल्द्वानी स्थित आवास से एक मृतक आश्रित को बैंक चेक देने जाने वाले थे। रोजमर्रा की तरह वह अपने काम के सिलसिले में घर से निकलने की तैयारी कर रहे थे। चेक देने के संबंध में उन्होंने मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष ध्रुव रौतेला से भी फोन पर बातचीत की थी। जोशी ने उनसे साथ चलने के लिए कहा और जज फार्म गेट पर मिलने की बात कही थी।
इसके बाद जोशी अपनी मोटरसाइकिल लेकर घर से निकलने की तैयारी करने लगे। उन्होंने जैसे ही बाइक स्टार्ट करने के लिए किक मारी, अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वह जमीन पर गिर गए। कुछ ही पलों में घर के बाहर चीख-पुकार मच गई। पत्नी और पड़ोसी तुरंत उनकी मदद के लिए दौड़े। बिना समय गंवाए उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
एक फोन कॉल के बाद बदल गया पूरा माहौल
जिस व्यक्ति से कुछ देर पहले तक जोशी ने अपने साथ चलने के लिए फोन पर बात की थी, उसके लिए भी यह खबर बेहद स्तब्ध करने वाली रही। कुछ ही देर पहले काम को लेकर हुई बातचीत के बाद अचानक उनके निधन की खबर ने हर किसी को झकझोर दिया। सूचना विभाग और पत्रकारों के बीच उनकी सहज उपलब्धता और आत्मीय व्यवहार के कारण उनके निधन की खबर तेजी से फैल गई।
गिरिजा शंकर जोशी का स्वभाव बेहद सहज, मिलनसार और जिंदादिल बताया जाता था। जिला सूचना अधिकारी के तौर पर उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ ही पत्रकारों के बीच भी अपनी अलग पहचान बनाई थी। पत्रकारों के साथ उनका व्यवहार हमेशा आत्मीय और सहयोगात्मक रहा। विभागीय कार्यों के साथ-साथ पत्रकारों से जुड़े विषयों को लेकर भी वह सक्रिय रहते थे।
पत्रकारों के लिए कई महत्वपूर्ण पहल आगे बढ़ाईं
हल्द्वानी में जिला सूचना अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए गिरिजा शंकर जोशी ने पत्रकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। नए मीडिया सेंटर की स्थापना की पहल और पत्रकारों के लिए प्रस्तावित गेस्ट हाउस की योजना उनके कार्यकाल की प्रमुख पहलों में शामिल रही।
पत्रकारों का कहना है कि जोशी की कार्यशैली में संवाद और सहयोग को खास महत्व मिलता था। किसी भी विभागीय अथवा पत्रकारों से जुड़े विषय पर उनसे बातचीत करना सहज रहता था। यही वजह रही कि वह पत्रकारों के बीच खासे लोकप्रिय थे।
अचानक चले गए, पीछे रह गईं यादें
गिरिजा शंकर जोशी के आकस्मिक निधन ने उनके परिवार के साथ-साथ सूचना विभाग और पत्रकारिता जगत को भी गहरा आघात पहुंचाया है। जिस दिन वह सामान्य रूप से अपने दायित्वों को निभाने के लिए घर से निकल रहे थे, उसी दिन अचानक उनकी जिंदगी का सफर थम गया।
उनके निधन की सूचना मिलते ही जिला सूचना कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने गहरा दुख व्यक्त किया। पत्रकारों और उनके परिचितों ने भी शोक जताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
गिरिजा शंकर जोशी अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं। अचानक हुए इस निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके सहयोगियों और परिचितों ने ईश्वर से शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
रविवार को चित्रशिला घाट पर होगा अंतिम संस्कार
परिजनों के अनुसार, गिरिजा शंकर जोशी की अंतिम यात्रा रविवार सुबह आठ बजे बीके पुरम, रेनबो पब्लिक स्कूल के निकट, बिठोरिया नंबर-1 स्थित आवास से निकलेगी। अंतिम यात्रा के बाद रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
