दिल्ली बनी गैस चैंबर: ठंड और खराब मौसम ने बढ़ाई सांसों की परेशानी, AQI 418 पहुंचा ‘गंभीर’ स्तर पर

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पारा गिरने और प्रतिकूल मौसमीय हालात के चलते वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सोमवार सुबह भी दिल्ली की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई। दिन की शुरुआत घने कोहरे और धुंध की मोटी परत के साथ हुई, जिससे कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम रही। प्रदूषण के चलते सांस के मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, वहीं आम लोगों को आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं भी हुईं। हालात इतने खराब रहे कि सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग मास्क पहने नजर आए।

Delhi Air Quality remains in ‘Severe’ category: एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 418 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। यह स्तर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक माना जाता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से ग्रसित लोगों के लिए।

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों में AQI बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया। अलीपुर में 395, आनंद विहार में 462, अशोक विहार में 473, आया नगर में 340, बवाना में 448, बुराड़ी में 460 और चांदनी चौक में 454 AQI दर्ज किया गया।

इसके अलावा, डीटीयू इलाके में 467, द्वारका सेक्टर-8 में 427, आईजीआई एयरपोर्ट टी-3 में 340, आईटीओ में 431, लोधी रोड में 382, मुंडका में 467, नजफगढ़ में 346, नरेला में 437, पंजाबी बाग में 434, आरकेपुरम में 439, रोहिणी में 471, सोनिया विहार में 469, विवेक विहार और वजीरपुर में 472 AQI रिकॉर्ड किया गया।

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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने शनिवार देर रात दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP)-4 की पाबंदियां लागू कर दी हैं। इसके साथ ही राजधानी में GRAP के सभी चरण प्रभावी हो गए हैं। GRAP-4 के तहत प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 5-पॉइंट एक्शन प्लान को सख्ती से लागू किया जाएगा, जिसमें निर्माण गतिविधियों पर रोक, भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध और औद्योगिक इकाइयों पर सख्त नियंत्रण शामिल है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बनी हुई गंभीर वायु गुणवत्ता का मुख्य कारण मौसम का मिजाज है। तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषण के कण नीचे की सतह पर फंस गए हैं। पश्चिमी विक्षोभ के चलते ठंडी हवा ऊपर नहीं उठ पा रही है, जिससे वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल और अन्य प्रदूषक वातावरण में जमा हो रहे हैं। हवा की गति कम होने और बारिश न होने के कारण यह प्रदूषण बाहर नहीं निकल पा रहा, जिससे हालात और भी बदतर हो गए हैं।