नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर बने खतरे के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। एलपीजी गैस लेकर आने वाला भारतीय टैंकर ‘शिवालिक’ सुरक्षित रूप से मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया है। ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग पर जोखिम काफी बढ़ गया था।
जानकारी के अनुसार यह एलपीजी टैंकर रविवार शाम करीब पांच बजे मुंद्रा पोर्ट पहुंचा। जहाज लगभग 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया है। इस गैस को देश के घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी आपूर्ति नेटवर्क में भेजा जाएगा। ‘शिवालिक’ एक विशाल गैस वाहक जहाज है, जिसका संचालन शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा किया जाता है। यह जहाज फारस की खाड़ी से अरब सागर को जोड़ने वाले अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत पहुंचा है।
दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की करीब 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरती है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है।
ईरान ने दी थी दो भारतीय जहाजों को अनुमति
तनावपूर्ण हालात के बीच ईरान ने दो भारतीय एलपीजी टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी थी। इनमें ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नाम के जहाज शामिल हैं। दोनों टैंकर करीब 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत के लिए रवाना हुए थे। अधिकारियों के मुताबिक दोनों जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़े हैं।
17 मार्च को कांडला पोर्ट पहुंचेगा दूसरा जहाज
मुंद्रा पोर्ट पहुंचने के बाद ‘शिवालिक’ से एलपीजी उतारने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और इसे देश के गैस वितरण नेटवर्क में भेजा जाएगा। वहीं दूसरा एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ के 17 मार्च को कांडला पोर्ट पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
पश्चिम एशिया में बढ़ा सैन्य तनाव
गौरतलब है कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर सैन्य हमले किए गए थे। इसके बाद ईरान ने जवाबी चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को लेकर सख्त रुख अपनाया था।
इसके चलते कुछ समय के लिए इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही कम हो गई थी और कई टैंकरों ने इस रास्ते से गुजरने से परहेज किया। ऐसे माहौल में ‘शिवालिक’ का सुरक्षित रूप से भारत पहुंचना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
