पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग, 15 साल बाद खत्म हुआ टीएमसी शासन

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कोलकाता। राज्यपाल आर. एन. रवि ने पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी कर दिया है। लोक भवन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह आदेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी किया गया है। आदेश के मुताबिक विधानसभा को 7 मई 2026 से प्रभावी रूप से भंग कर दिया गया है।

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अधिसूचना में कहा गया है कि विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई। वर्ष 2021 में गठित विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सरकार बनाई थी।

हालिया विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया, जबकि टीएमसी 80 सीटों तक सिमट गई।

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सूत्रों के अनुसार भाजपा विधायक दल की बैठक शुक्रवार को केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित शाह की मौजूदगी में होगी, जिसमें नेता का चयन किया जाएगा। इसके बाद शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन प्रस्तावित है। समारोह में नरेंद्र मोदी सहित एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं।

राजनीतिक हलकों में शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। हालांकि भाजपा विधायक दल की औपचारिक बैठक के बाद ही नए नेता के नाम की आधिकारिक घोषणा होगी।

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उधर, चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी ने परिणामों पर सवाल उठाते हुए इस्तीफा देने से इनकार किया था, जिसके बाद राज्य में संवैधानिक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। विधानसभा भंग होने के साथ ही टीएमसी के 15 साल लंबे शासन का औपचारिक अंत हो गया।

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