पंतनगर। टाटा मोटर्स फाउंडेशन का इंटीग्रेटेड विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईवीडीपी) ऊधम सिंह नगर जिले की खटोला ग्राम पंचायत में ग्रामीण विकास का सफल मॉडल बनकर उभरा है। कार्यक्रम के माध्यम से अब तक करीब पांच हजार ग्रामीणों के जीवन में सामाजिक और आर्थिक स्तर पर उल्लेखनीय बदलाव आया है। खेती, स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों से गांवों की तस्वीर बदलने लगी है।

गदरपुर ब्लॉक स्थित खटोला ग्राम पंचायत में लगभग एक हजार परिवार निवास करते हैं। इनमें अधिकांश छोटे और सीमांत किसान हैं, जिन्हें लंबे समय से आधुनिक कृषि तकनीकों, सिंचाई सुविधाओं और बेहतर बाजार तक पहुंच की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के सीमित अवसरों ने भी क्षेत्र के विकास को प्रभावित किया।
इन चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से टाटा मोटर्स फाउंडेशन ने जिला प्रशासन और इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल डेवलपमेंट के सहयोग से इंटीग्रेटेड विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम की शुरुआत की। कार्यक्रम के तहत जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने, स्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छता सुविधाओं में सुधार, डिजिटल एवं कंप्यूटर शिक्षा को मजबूत करने तथा महिलाओं को स्वरोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया गया।
टाटा मोटर्स फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विनोद कुलकर्णी ने कहा कि यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और समुदाय की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी और प्रभावी परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के पहले ही वर्ष में पांच हजार लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देना जिला प्रशासन, सहयोगी संस्थाओं और स्थानीय समुदाय के बीच मजबूत साझेदारी का परिणाम है।
आईवीडीपी के प्रभाव को देखते हुए खटोला ग्राम पंचायत के चार गांवों में से एक गांव का चयन ‘मुख्यमंत्री आदर्श गांव’ योजना के तहत किया गया है। इसके साथ ही पंचायत को वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए भी चयनित किया गया है, जो इस पहल की सफलता का बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।
वर्ष 2018 में शुरू हुआ यह कार्यक्रम आज ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक भागीदारी का एक प्रभावी मॉडल बन चुका है। कार्यक्रम के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने, महिलाओं की आय में वृद्धि करने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।
प्रमुख उपलब्धियां
- सौर सिंचाई पंपों की स्थापना से किसानों की डीजल और बिजली पर निर्भरता कम हुई। इससे लागत में 80 से 100 प्रतिशत तक कमी आई और प्रति एकड़ प्रति फसल सीजन 30 हजार से 90 हजार रुपये तक की बचत संभव हुई।
- स्वास्थ्य जांच शिविरों में 65 से 70 प्रतिशत महिलाओं में एनीमिया की पहचान की गई, जिससे समय पर उपचार और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिली।
- लगभग 600 परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया गया।
- महिलाओं द्वारा संचालित लघु उद्यमों ने सामूहिक रूप से करीब तीन लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित की, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला।
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में आईवीडीपी की यह पहल अब अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी और संस्थागत सहयोग के बल पर खटोला ग्राम पंचायत विकास और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही है।

