हल्द्वानी: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की “धाकड़” छवि और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे भले ही सियासी मंचों पर गूंज रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को सीधी चुनौती देती नजर आ रही है।
देश के शीर्ष नेताओं, यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तक से तारीफ बटोरने वाली धामी सरकार के सामने अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या सिस्टम ही माफियाओं के सामने नतमस्तक हो चुका है?
टैक्स चोरी का ‘ओपन सीक्रेट’, फिर भी खामोशी क्यों?
कुमाऊं मंडल के ऊधमसिंह नगर से लेकर हल्द्वानी तक टैक्स चोरी का खेल अब “ओपन सीक्रेट” बन चुका है। दिल्ली, गाजियाबाद और बरेली से रोजाना ट्रकों में भरकर करोड़ों का माल बिना टैक्स चुकाए उत्तराखंड में दाखिल हो रहा है।
रुद्रपुर, किच्छा और काशीपुर में बैठे कथित ट्रांसपोर्ट एजेंट इस माल को छोटे वाहनों में बांटकर हल्द्वानी पहुंचा रहे हैं—और ये सब कुछ ऐसे हो रहा है जैसे किसी को कोई डर ही न हो।
सवालों के घेरे में पूरा तंत्र
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह खेल खुलेआम चल रहा है तो राज्य कर विभाग आखिर कर क्या रहा है? क्या अधिकारियों को कुछ दिखाई नहीं दे रहा या फिर “सब कुछ देखकर भी अनदेखा” किया जा रहा है?
सूत्रों की मानें तो बिना “ऊपर तक सेटिंग” के इतना बड़ा नेटवर्क चल पाना संभव ही नहीं है। यही वजह है कि अब उंगलियां सीधे विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठने लगी हैं।
सरकार को रोजाना लाखों का नुकसान, जिम्मेदार कौन?
इस संगठित सिंडिकेट के चलते सरकार को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है। जो पैसा विकास कार्यों में लगना चाहिए, वह कथित तौर पर माफियाओं और भ्रष्ट तंत्र की जेब में जा रहा है।
धामी सरकार के दावों की खुलती पोल
भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड का दावा करने वाली सरकार के लिए यह मामला किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एक तरफ सख्ती के दावे, दूसरी तरफ जमीन पर बेलगाम माफिया—यह विरोधाभास सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सबकी निगाहें अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर टिकी हैं—क्या वे इस टैक्स माफिया पर सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा?
अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कुमाऊं का यह टैक्स चोरी सिंडिकेट आने वाले दिनों में और भी विकराल रूप ले सकता है।
