उत्तराखंड: सीएम धामी ने 18 और कार्यकर्ताओं को सौंपे दायित्व, दूसरी सूची जारी

खबर शेयर करें

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाजपा के 18 और कार्यकर्ताओं को विभिन्न विभागीय दायित्व सौंपे हैं। यह दायित्वों की दूसरी सूची है, जिसमें कई प्रमुख पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। सरकार का मानना है कि इन नियुक्तियों से जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और उनका प्रभावी अनुश्रवण संभव होगा। सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने इसकी जानकारी दी।

इन नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारी

भाजपा प्रदेश कोषाध्यक्ष पुनीत मित्तल को नगरीय पर्यावरण संरक्षण परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, बलवीर घुनियाल और भुवन विक्रम डबराल को जड़ी-बूटी सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: झंगोरा पर सरकार का फोकस, न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा जल्द

इसके अलावा, सुरेंद्र मोघा को उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड, सुभाष बर्थवाल को राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद, गिरीश डोभाल को प्रदेशीय मौन परिषद, गीताराम गौड़ को उत्तराखंड जनजाति सलाहकार परिषद, और डॉ. जयपाल को राज्य उच्च शिक्षा उन्नयन समिति का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

यह भी पढ़ें 👉  देशभर में 84 दवाओं की गुणवत्ता में हुई भारी चूक, सरकार ने जारी किया अलर्ट

अन्य कार्यकर्ताओं को भी मिले महत्वपूर्ण पद

  • देशराज कर्णवाल – उपाध्यक्ष, समाज कल्याण योजनाएं एवं अनुश्रवण समिति
  • अजीत चौधरी – उपाध्यक्ष, उत्तराखंड राज्य किसान आयोग
  • प्रताप सिंह पंवार – उपाध्यक्ष, राज्य औषधीय पादप बोर्ड
  • जगत सिंह चौहान – उपाध्यक्ष, राज्य स्तरीय लघु सिंचाई सलाहकार समिति
  • गीता रावत – अध्यक्ष, राज्य स्तरीय सतर्कता समिति
  • शंकर कोरंगा – उपाध्यक्ष, राज्य स्तरीय जलागम परिषद
  • महेश्वर सिंह महरा – उपाध्यक्ष, चाय विकास सलाहकार परिषद
  • सरदार मनजीत सिंह – सह-अध्यक्ष, प्रदेश स्तरीय गन्ना विकास सलाहकार समिति
  • नवीन वर्मा – उपाध्यक्ष, वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद
  • अशोक नब्याल – उपाध्यक्ष, उत्तराखंड जनजाति सलाहकार परिषद
यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज और कैंसर संस्थान को मिले 285 नए नर्सिंग अधिकारी

सरकार को उम्मीद, विकास कार्यों में आएगी तेजी

सरकार का मानना है कि इन दायित्वों के सौंपे जाने से विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और अनुश्रवण में सुधार होगा। इससे सरकारी नीतियों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद मिलेगी।