हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल में टैक्स चोरी के खिलाफ राज्य कर विभाग की कार्रवाई महज औपचारिकता बनकर रह गई है। चार दिन की सख्ती के बाद ही पूरा अभियान ढह गया और नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही टैक्स चोरी का काला कारोबार फिर बेखौफ होकर सड़कों पर लौट आया है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली, गाजियाबाद, बरेली समेत कई राज्यों से बंद बॉडी ट्रकों में बिना टैक्स का माल बड़े पैमाने पर रुद्रपुर, काशीपुर, किच्छा होते हुए हल्द्वानी पहुंच रहा है। यह माल कथित ट्रांसपोर्ट कंपनियों के जरिए खुलेआम उतारा जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इस पूरे नेटवर्क में ट्रांसपोर्टर और कुछ व्यापारी मोटे मुनाफे के लालच में सक्रिय हैं। वहीं, विभागीय स्तर पर भी मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा, क्योंकि हालिया कार्रवाई के बाद इतनी जल्दी हालात का फिर सामान्य हो जाना कई सवाल खड़े करता है।
एक ओर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे उलट दिखाई दे रही है। राज्य कर विभाग की ढिलाई अब सीधे तौर पर सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ऊधमसिंह नगर में राज्य कर विभाग की टीमों ने ताबड़तोड़ चेकिंग अभियान चलाकर कुछ वाहनों को पकड़ा था और लाखों रुपये का जुर्माना भी वसूला था। उस कार्रवाई का असर कुछ ही दिनों तक रहा और अब एक अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही टैक्स चोरी का नेटवर्क फिर सक्रिय हो गया है।
स्थिति यह है कि ट्रकों की आवाजाही और माल की ढुलाई खुलेआम हो रही है, लेकिन प्रभावी रोकथाम नजर नहीं आ रही। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह केवल लापरवाही है या फिर सिस्टम के भीतर कहीं न कहीं बड़ी खामी मौजूद है, जिसका फायदा उठाकर यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
