हकलाहट से ‘ग्रीक गॉड’ तक: संघर्ष, मेहनत और सफलता की मिसाल हैं ऋतिक रोशन

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मुंबई। बॉलीवुड में जब भी परफेक्ट लुक, दमदार डांस और बेहतरीन अभिनय की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है ऋतिक रोशन का। लाखों दिलों की धड़कन बन चुके ऋतिक को आज ‘ग्रीक गॉड’ कहा जाता है, लेकिन इस चमकते सितारे की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।

ENTERTAINMENT SPECIAL | INSPIRATIONAL STORY– आज जिस अभिनेता को आत्मविश्वास और प्रभावशाली संवाद अदायगी के लिए जाना जाता है, वही ऋतिक रोशन कभी हकलाने की गंभीर समस्या से जूझते थे। बचपन में हालात इतने कठिन थे कि वे बोलने से कतराते थे। स्कूल के दिनों में उन्हें मजाक का सामना करना पड़ा और कई बार वे खुद को लोगों से छिपाने लगे। लेकिन यहीं से शुरू होती है एक जुझारू कलाकार की असली कहानी।

फिल्मी परिवार, लेकिन संघर्ष असली
ऋतिक रोशन का जन्म 10 जनवरी 1974 को मुंबई में हुआ। वे एक प्रतिष्ठित फिल्मी परिवार से आते हैं। पिता राकेश रोशन निर्देशक-निर्माता हैं, दादा रोशनलाल नागरथ मशहूर संगीतकार थे और चाचा राजेश रोशन भी संगीत की दुनिया का बड़ा नाम हैं। बावजूद इसके ऋतिक का बचपन आसान नहीं रहा। हकलाने की समस्या ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया था, लेकिन ऋतिक ने हालात को स्वीकार कर हार मानने के बजाय, खुद को बदलने का फैसला किया।

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अखबार बना हथियार, आत्मविश्वास बना ताकत
ऋतिक ने अपनी कमजोरी को दूर करने के लिए एक अनोखा रास्ता चुना। उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू अखबार रोज़ ज़ोर-ज़ोर से पढ़ने शुरू किए। लगातार अभ्यास, उच्चारण पर मेहनत और आत्मसंयम ने धीरे-धीरे उनकी बोलचाल को बेहतर बना दिया। यह सिर्फ हकलाने से लड़ाई नहीं थी, बल्कि खुद पर भरोसा जीतने की जंग थी।

चाइल्ड आर्टिस्ट से सुपरस्टार तक
बहुत कम लोग जानते हैं कि ऋतिक ने 10 साल की उम्र में ही फिल्मों में कदम रख दिया था। वे रजनीकांत की फिल्म ‘भगवान दादा’ में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट नजर आए। अभिनय उनके लिए नया नहीं था, लेकिन बतौर हीरो खुद को साबित करना आसान नहीं था।

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‘कहो ना… प्यार है’ से बदली किस्मत
साल 2000 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘कहो ना… प्यार है’ ने ऋतिक रोशन को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। डांस, लुक और अभिनय—हर मोर्चे पर उन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया। यह फिल्म न सिर्फ हिट हुई, बल्कि ऋतिक को यूथ आइकन बना गई।

सफलता के बाद भी जारी रहा संघर्ष
पहली फिल्म की ऐतिहासिक सफलता के बाद भी ऋतिक का सफर आसान नहीं रहा। कुछ फिल्में उम्मीद के मुताबिक नहीं चलीं, लेकिन उन्होंने खुद को हर बार नए अंदाज़ में पेश किया। ‘धूम 2’, ‘कृष’, ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’, ‘अग्निपथ’ और ‘सुपर 30’ जैसी फिल्मों में उन्होंने यह साबित किया कि वे सिर्फ स्टार नहीं, बल्कि एक संजीदा अभिनेता हैं।

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फिटनेस और डांस का ट्रेंडसेटर
ऋतिक रोशन ने बॉलीवुड में फिटनेस का नया ट्रेंड शुरू किया। 2000 के दशक में जब जिम कल्चर नया था, तब ऋतिक ने युवाओं को फिटनेस के प्रति प्रेरित किया। उनका डांस आज भी इंडस्ट्री में बेंचमार्क माना जाता है।

सम्मान, पुरस्कार और प्रेरणा
ऋतिक को अपने करियर में बेस्ट डेब्यू, बेस्ट एक्टर, बेस्ट डांसर सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। निजी जीवन में उतार-चढ़ाव के बावजूद उन्होंने कभी अपने काम से समझौता नहीं किया।

एक मिसाल, एक प्रेरणा
ऋतिक रोशन की कहानी सिर्फ एक सुपरस्टार की नहीं, बल्कि उस इंसान की है जिसने अपनी कमजोरी को ताकत बनाया। हकलाने वाले बच्चे से लेकर करोड़ों दिलों की धड़कन बनने तक का उनका सफर हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो हालात से हार मानने की सोच रहा है।