Uttarakhand: गीता प्रेस के ‘कल्याण’ पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन, अमित शाह बोले-सनातन चेतना का विश्वव्यापी पथप्रदर्शक है ‘कल्याण’

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ऋषिकेश। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को उत्तराखंड के ऋषिकेश में गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी अंक के विमोचन समारोह को संबोधित किया। कार्यक्रम से पूर्व उन्होंने लक्ष्मीनारायण मंदिर एवं मां गंगा के दर्शन-पूजन भी किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित अनेक संत-महात्मा, विद्वान और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। समारोह में सनातन संस्कृति, भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों पर व्यापक चर्चा हुई।

Centenary Edition of ‘Kalyan’ Magazine Released in Rishikesh: अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि आज पूरी दुनिया अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रही है। उन्होंने कहा कि भारत और विश्व में इस भूमि से प्रेम करने वाला शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो गीता प्रेस से परिचित न हो। शाह ने कहा कि पूज्य हनुमान प्रसाद पोद्दार जी ने गीता प्रेस के माध्यम से बीते 103 वर्षों से सनातन धर्म की लौ को निरंतर प्रज्ज्वलित रखा और करोड़ों लोगों को भक्ति एवं आध्यात्म के मार्ग से जोड़ते हुए मोक्ष के पथ पर अग्रसर किया।

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केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि गीता प्रेस मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि पीढ़ियों के निर्माण के लिए कार्य कर रही है। ‘कल्याण’ पत्रिका को उन्होंने ज्ञान की सनातन ज्योति बताते हुए कहा कि यह केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि भारतीय समाज के लिए आध्यात्मिक जगत का पथप्रदर्शक है। उन्होंने कहा कि ‘कल्याण’ ने अपने 100 वर्षों के सफर में हर संकट के दौर में भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के दीप को जलाए रखा।

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अमित शाह ने कहा कि जब अंग्रेजी शासन के समय धर्म को अंधविश्वास कहने का चलन बढ़ रहा था, तब बिना आक्रामक भाषा के ‘कल्याण’ ने ज्ञान और तर्क के माध्यम से भारतीय संस्कृति का संरक्षण किया। उन्होंने कहा कि सनातन की रक्षा शोर से नहीं, बल्कि शास्त्र, तर्क और सत्य के बल पर होती है। यही कारण है कि ‘कल्याण’ ने कभी विज्ञापन नहीं छापा और बाजार के दबाव से मुक्त रहकर चरित्र और राष्ट्र निर्माण का कार्य किया।

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शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उल्लेख करते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, केदारनाथ पुनर्निर्माण, बद्रीनाथ धाम का विकास और सोमनाथ स्वाभिमान वर्ष जैसे प्रयास भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘कल्याण’ और गीता प्रेस जैसी संस्थाओं ने विकट समय में भी सनातन धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की आत्मा को जीवित रखा है, जिसके कारण आज भारत एक बार फिर आत्मगौरव के साथ विश्वपटल पर खड़ा है।