पश्चिम एशिया संकट पर पीएम की बैठक…राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश, सप्लाई-चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ डिजिटल बैठक कर हालात की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने ‘टीम इंडिया’ की भावना से मिलकर काम करने पर जोर देते हुए कहा कि देश इस चुनौती से सफलतापूर्वक निपट सकता है।

बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता आर्थिक व व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत रखना है। उन्होंने राज्यों से आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी व मुनाफाखोरी पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

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प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र को लेकर भी विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा। उन्होंने उर्वरकों के भंडारण और वितरण की निगरानी बढ़ाने और अग्रिम योजना बनाने पर जोर दिया, ताकि किसी भी स्थिति में किसानों को परेशानी न हो।

सूत्रों के अनुसार, यह बैठक केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री इसमें शामिल नहीं हुए, जबकि उनके मुख्य सचिवों के साथ अलग से बैठक की जाएगी।

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बैठक में योगी आदित्यनाथ, एन चंद्रबाबू नायडू, रेवंत रेड्डी, भगवंत मान, भूपेंद्र पटेल, उमर अब्दुल्ला, सुखविंदर सिंह सुक्खू और पेमा खांडू समेत कई मुख्यमंत्री शामिल हुए। इसके अलावा राजनाथ सिंह और अमित शाह भी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री ने आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तटीय, सीमा, साइबर और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है, क्योंकि कुछ असामाजिक तत्व ऐसे हालात का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

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सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और लगभग 60 दिनों का भंडार उपलब्ध है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल की आपूर्ति पहले से सुनिश्चित है और भारत 40 से अधिक देशों से तेल आयात कर रहा है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम बनी हुई है।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से धैर्य, संयम और सतर्कता बनाए रखने की अपील करते हुए अफवाहों से बचने और सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा।

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