न्यूयॉर्क। वेनेज़ुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो सोमवार को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन पहुंचे, जहां उन्हें अमेरिका में पहली बार संघीय अदालत में पेश किया गया। यह घटनाक्रम काराकास में उनकी नाटकीय गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद सामने आया है। मादुरो को हेलिकॉप्टर के जरिए मैनहट्टन संघीय अदालत के पास स्थित हेलिपोर्ट लाया गया, जिसके बाद उन्हें कड़े सुरक्षा घेरे में बख्तरबंद वाहन से कोर्ट पहुंचाया गया।
63 वर्षीय मादुरो हल्के भूरे रंग की जेल पोशाक और चमकीले नारंगी जूतों में नजर आए। ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) के एजेंट उन्हें सुरक्षा के साथ अदालत ले गए। उन्हें चलते समय लंगड़ाते हुए देखा गया। उनके साथ एक महिला भी मौजूद थी, जिन्हें उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस बताया जा रहा है, जो इस मामले में हिरासत में हैं।
इससे पहले मादुरो को ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया था, जहां अमेरिका लाए जाने के बाद उन्हें ड्रग्स और हथियारों से जुड़े आरोपों में हिरासत में लिया गया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मादुरो को एक सैन्य अभियान के तहत वेनेज़ुएला से गिरफ्तार कर अमेरिका लाया गया।
मादुरो पर नशीली दवाओं की तस्करी और आतंकवाद से जुड़ी साजिश, कोकीन तस्करी, मशीनगन और विनाशकारी हथियार रखने, तथा हथियार रखने की साजिश सहित चार प्रमुख आरोप लगाए गए हैं। ये आरोप 2020 में लगाए गए पुराने मामलों का विस्तार हैं, जिनमें अब एक नया अभियोग दायर किया गया है। इस नए अभियोग में और अधिक विवरण जोड़े गए हैं और कई नए लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें मादुरो की पत्नी भी शामिल हैं।
यह मामला न्यूयॉर्क की अमेरिकी जिला अदालत के वरिष्ठ जज एल्विन के. हेलरस्टीन को सौंपा गया है। हेलरस्टीन अमेरिका के सबसे अनुभवी न्यायाधीशों में गिने जाते हैं और आतंकवाद व राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने वेनेज़ुएला के पूर्व खुफिया प्रमुख ह्यूगो कार्वाजल के मामले की भी सुनवाई की थी, जिसमें आरोपी ने नशीली दवाओं और आतंकवाद से जुड़े आरोप स्वीकार किए थे।
अभियोजकों का आरोप है कि मादुरो और उनके करीबी अधिकारियों ने 25 वर्षों से अधिक समय तक सत्ता का दुरुपयोग करते हुए सरकारी संस्थानों को भ्रष्ट किया और बड़ी मात्रा में कोकीन अमेरिका भेजने में मदद की। आरोपों के अनुसार, उन्होंने सिनालोआ कार्टेल और ट्रेन दे अरागुआ जैसे आपराधिक गिरोहों को सुरक्षा और लॉजिस्टिक सहायता दी और इसके बदले भारी रिश्वत व मुनाफा हासिल किया।
