नेपाल में कुदरत का कहर: तिब्बत से आई बाढ़ ने मचाई तबाही, 162 मौतें, 750 से ज्यादा लापता, 133 भारतीय भी शामिल

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काठमांडू। पड़ोसी देश नेपाल में तिब्बत से आई अचानक और भीषण बाढ़ ने तबाही का ऐसा मंजर खड़ा कर दिया है, जिससे पूरा इलाका दहल उठा है। भोटेकोशी नदी के अचानक उफान पर आने से देखते ही देखते कई कस्बे और गांव पानी और मलबे की चपेट में आ गए। पुल बह गए, सड़कें टूट गईं, इमारतें ढह गईं और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा। नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 162 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 750 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव एजेंसियां मलबे में जिंदगी तलाश रही हैं, वहीं बड़ी संख्या में परिवार अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं।

भूकंप के तीन मिनट बाद आई बाढ़ ने मचाई तबाही

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके महज तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ की सूचना मिली। शुरुआती तौर पर माना गया कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियर या बर्फ का बड़ा हिस्सा टूट गया होगा, जिससे अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर आया।

हालांकि, विशेषज्ञों और नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की शुरुआती जांच में हिमस्खलन को बाढ़ की संभावित वजह माना गया है। उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण में ल्हेंडे नदी के ऊपरी क्षेत्र में हिमस्खलन और इसके बाद नदी में अचानक बढ़े जलप्रवाह के संकेत मिले हैं। प्राधिकरण के मुताबिक, यह हिमस्खलन तिब्बत में रसुवागढ़ी सीमा चौकी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुआ था। 25 और 26 अगस्त की उपग्रह तस्वीरों में हिमस्खलन के बाद ल्हेंडे नदी में बाढ़ के निशान दिखाई दिए।

देखते ही देखते बह गए पुल, सड़कें और इमारतें

बुधवार तड़के भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा और कुछ ही समय में नदी ने विकराल रूप ले लिया। तेज बहाव अपने साथ भारी मात्रा में मलबा, मिट्टी और पत्थर लेकर आया। नदी के रास्ते में आने वाले कई पुल और इमारतें इसकी चपेट में आ गईं।

कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है। करीब 12 जलविद्युत परियोजनाएं भी बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण बचाव दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

नेपाल पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित घरों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। स्थानीय लोगों की मदद से मलबा हटाने और लापता लोगों की तलाश का अभियान भी चलाया जा रहा है।

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133 भारतीयों समेत सैकड़ों लोगों की तलाश

बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चिंता बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने को लेकर है। नेपाल पुलिस के अनुसार 750 से ज्यादा लोग लापता हैं। इनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में भारतीय तीर्थयात्रा के लिए नेपाल पहुंचे थे।

नेपाल के पर्यटन अधिकारियों के मुताबिक करीब 400 पर्यटकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें लगभग 340 विदेशी नागरिक हैं। शुरुआती आंकड़ों में अमेरिका के 47, ऑस्ट्रेलिया के 34, ब्रिटेन के 33 और कनाडा के 24 नागरिकों के भी लापता होने की बात सामने आई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े अभी अंतिम नहीं हैं और बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ बदल सकते हैं।

संचार व्यवस्था ठप होने से लापता लोगों की जानकारी जुटाना भी बड़ी चुनौती बन गया है। कई इलाकों में बिजली नहीं है और मोबाइल नेटवर्क व टेलीफोन सेवाएं बाधित हैं। ऐसे में पुलिस को मोबाइल फोन की रोशनी में लापता लोगों के नाम तक दर्ज करने पड़े।

रसुवा में नौ बैंक शाखाएं बहीं, 26 कर्मचारी लापता

बाढ़ ने नेपाल के बैंकिंग क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपाल बैंकर्स एसोसिएशन के मुताबिक रसुवा जिले में विभिन्न वाणिज्यिक बैंकों की नौ शाखाएं बाढ़ में बह गईं।

इन शाखाओं में काम करने वाले करीब 26 कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पाया है। टेलीफोन लाइनें खराब होने और बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण कर्मचारियों की स्थिति की जानकारी हासिल करना मुश्किल हो रहा है। प्रभावित शाखाओं में माछापुछ्रे, नबिल, सनिमा, लक्ष्मी सनराइज, हिमालयन, प्रभु, ग्लोबल आईएमई, इन्वेस्टमेंट मेगा और एनएमएबी बैंक की शाखाएं शामिल हैं।

काठमांडू से 49 बचाव उड़ानें, हेलीकॉप्टरों से पहुंचाई जा रही मदद

रसुवा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए काठमांडू हवाई अड्डे से 49 बचाव उड़ानें संचालित की गईं। आरसीसी कार्यालय के अनुसार बुधवार शाम 5:20 बजे तक निजी और सरकारी हेलीकॉप्टरों ने धुंचे, तिमुरे, स्याफ्रुबेसी, मैलुंग, त्रिशूली और धाडिंग सहित कई इलाकों के लिए उड़ान भरी। दुर्गम इलाकों में सड़क संपर्क टूटने के कारण हेलीकॉप्टर राहत और बचाव अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं।

भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, भेजी 10 टन राहत सामग्री

नेपाल की इस भयावह आपदा के बीच भारत ने तत्काल मदद पहुंचाई है। भारत ने राहत अभियान के लिए 10 टन मानवीय सहायता सामग्री नेपाल भेजी है। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने यह सहायता संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खडका राज पौडेल को सौंपी। भारतीय दूतावास ने कहा कि यह सहायता बाढ़ प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतें पूरी करने में मदद करेगी।

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भारत ने दोहराया है कि संकट की इस घड़ी में वह नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और जरूरत के मुताबिक हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

पीएम मोदी ने नेपाली पीएम से की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत कर बाढ़ से पैदा हुए हालात पर चर्चा की। उन्होंने नेपाल को हर संभव सहायता का भरोसा दिया।

पीएम मोदी ने कहा कि मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। भारत की टीमें राहत और बचाव कार्यों में सहयोग कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

रेड क्रॉस ने भी खोला आपात सहायता कोष

नेपाल में राहत अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस एवं रेड क्रिसेंट सोसाइटी महासंघ ने नेपाल के लिए 10 लाख स्विस फ्रैंक, करीब 12 लाख अमेरिकी डॉलर की आपात सहायता जारी करने की घोषणा की है।

यह राशि नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी को दी जाएगी। इससे बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने के साथ प्रभावित क्षेत्रों और समुदायों की जरूरतों का आकलन किया जाएगा।

अमेरिका, कनाडा और संयुक्त राष्ट्र ने जताया दुख

नेपाल में हुई तबाही पर अमेरिका, कनाडा और संयुक्त राष्ट्र ने भी गहरी चिंता जताई है। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि इस मुश्किल समय में अमेरिका नेपाल के लोगों के साथ खड़ा है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ पर दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। संयुक्त राष्ट्र की टीमें नेपाल सरकार के नेतृत्व वाले राहत अभियान में सहयोग कर रही हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी भोटेकोशी बाढ़ पर दुख जताया और उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की, जिन्होंने अपने करीबियों को खोया है। उन्होंने कहा कि कनाडा सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर मदद के लिए तैयार है।

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आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने भी नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ एकजुटता जताते हुए लापता लोगों और उनके परिवारों के लिए प्रार्थना की अपील की।

सवालों के घेरे में नेपाल की चेतावनी प्रणाली

इस भीषण आपदा के बाद नेपाल की आपदा पूर्व चेतावनी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रसुवा जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें तिब्बत से शुरू हुई बाढ़ के बारे में समय रहते जानकारी नहीं मिली।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के पूर्व कार्यकारी प्रमुख अनिल पोखरेल ने कहा कि नेपाल को चीन की ओर से आने वाली ऐसी आपदाओं के लिए प्रभावी सीमा-पार चेतावनी प्रणाली विकसित करनी होगी।

उनका कहना है कि यदि तिब्बत में हिमस्खलन, ग्लेशियर टूटने या अचानक जलप्रवाह बढ़ने जैसी घटना की जानकारी नेपाल को समय रहते मिल जाए तो संवेदनशील इलाकों से लोगों को पहले ही हटाया जा सकता है और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है।

क्या नेपाल को मिली थी चेतावनी?

बाढ़ की भयावहता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस आपदा के लिए पहले से कोई चेतावनी संभव थी। यदि तिब्बत में हिमस्खलन हुआ और उसके बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा, तो नेपाल तक इसकी सूचना पहुंचने में इतना समय क्यों लगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक जोखिमों को देखते हुए केवल आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। रियल टाइम निगरानी, सीमा पार सूचना साझा करने और शुरुआती चेतावनी तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

तिब्बत में भी भारी नुकसान

इस प्राकृतिक आपदा का असर तिब्बत में भी देखने को मिला है। चीन के सरकारी प्रसारक के मुताबिक तिब्बत में बाढ़ और मलबे के कारण तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि 265 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

नेपाल में फिलहाल राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। मलबे में लापता लोगों की तलाश की जा रही है और हेलीकॉप्टरों के जरिए दुर्गम इलाकों में राहत पहुंचाई जा रही है। दूसरी ओर, सैकड़ों परिवार अपनों की सलामती की खबर का इंतजार कर रहे हैं।

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