नोएडा में मजदूर आंदोलन ने लिया हिंसक रूप, पुलिस से झड़प के बाद आगजनी-तोड़फोड़

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नोएडा। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर नोएडा में वेतन बढ़ोतरी और श्रमिक अधिकारों की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन सोमवार को हिंसक हो गया। ग्रेटर नोएडा के फेस-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स में प्रदर्शन कर रहे मजदूरों और पुलिस के बीच उस समय टकराव हो गया जब बड़ी संख्या में श्रमिक सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन उग्र हो गया। देखते ही देखते गुस्साई भीड़ ने पुलिस की वैन में तोड़फोड़ शुरू कर दी, कई वाहनों को पलट दिया और अलग-अलग स्थानों पर आगजनी कर दी।

हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और औद्योगिक क्षेत्र में तनाव फैल गया। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी और प्रशासनिक अधिकारी तैनात कर दिए गए हैं।

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बताया जा रहा है कि यह आंदोलन पिछले कई दिनों से जारी है, जिसकी शुरुआत गुरुग्राम से हुई थी और धीरे-धीरे नोएडा तक पहुंच गया। शुरुआत में मजदूर शांतिपूर्वक अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सोमवार सुबह फेस-2 और ईकोटेक थर्ड क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रमिकों के जुटने और सड़क जाम के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया और प्रदर्शन हिंसा में बदल गया।

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नोएडा फेस-2 और ईकोटेक थर्ड क्षेत्र में सैकड़ों फैक्ट्रियां संचालित हैं और बताया जा रहा है कि करीब 500 से अधिक कंपनियों के कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं। आंदोलन के चलते कई फैक्ट्रियों का कामकाज प्रभावित हुआ है और उत्पादन ठप होने की स्थिति बन गई है।

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प्रदर्शन कर रहे मजदूरों की मांग है कि न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान मिले, काम के घंटे तय हों, साप्ताहिक अवकाश दिया जाए और श्रम कानूनों का सख्ती से पालन हो। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें 500 से 700 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी दी जाती है, जबकि उनसे 10 से 12 घंटे तक काम कराया जाता है और ओवरटाइम का भुगतान भी सही तरीके से नहीं किया जाता।

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घटना के बाद गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उद्योग प्रतिनिधियों और श्रमिक संगठनों के साथ बैठक कर समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन ने श्रमिकों की शिकायतों के लिए 24 घंटे का कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है और कंपनियों को समय पर वेतन तथा ओवरटाइम भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। श्रमिक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।

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