मुंबई। मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा। BSE Sensex और NIFTY 50 भारी गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,048.34 अंक यानी 1.29 प्रतिशत लुढ़ककर 80,238.85 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 312.95 अंक या 1.24 प्रतिशत गिरकर 24,865.70 पर आ गया।
निवेशकों के 7 लाख करोड़ रुपये डूबे
तेज गिरावट के चलते Bombay Stock Exchange (बीएसई) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 7 लाख करोड़ रुपये घटकर 456 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो शुक्रवार को 463 लाख करोड़ रुपये था। इससे निवेशकों की संपत्ति में भारी सेंध लगी।
सेक्टरवार गिरावट का दबाव
अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।
- निफ्टी इन्फ्रा 2.23%
- निफ्टी ऑटो 2.20%
- निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 2.15%
- निफ्टी ऑयल एंड गैस 2.15%
- निफ्टी पीएसयू 1.84%
- निफ्टी मीडिया 1.82%
- निफ्टी रियल्टी 1.61%
- निफ्टी एनर्जी 1.61%
हालांकि, निफ्टी इंडिया डिफेंस (0.49%), निफ्टी मेटल (0.24%) और निफ्टी फार्मा (0.02%) में मामूली बढ़त देखने को मिली।
सेंसेक्स पैक में ये रहे टॉप गेनर-लूजर
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में Bharat Electronics Limited, Sun Pharmaceutical Industries और ITC Limited बढ़त के साथ बंद हुए।
वहीं InterGlobe Aviation, Larsen & Toubro, Maruti Suzuki, Asian Paints, Bajaj Finserv, Mahindra & Mahindra, Bajaj Finance, HCL Technologies, Trent Limited, Titan Company, UltraTech Cement, Power Grid Corporation of India, NTPC Limited, State Bank of India और Axis Bank में तेज गिरावट रही।
मिडकैप-स्मॉलकैप भी दबाव में
बड़ी कंपनियों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली।
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 935.10 अंक या 1.58 प्रतिशत गिरकर 58,180.50 पर बंद हुआ।
निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 296.50 अंक या 1.75 प्रतिशत टूटकर 16,632.40 पर आ गया।
आगे क्या?
एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे के अनुसार, “मध्यपूर्व में तनावपूर्ण हालात के कारण बाजार की शुरुआत ही कमजोर रही। निफ्टी दैनिक चार्ट पर बढ़ती ट्रेंडलाइन से नीचे फिसल गया है, जो कमजोरी का संकेत है। आरएसआई मंदी के क्रॉसओवर में है, जिससे बाजार की रफ्तार कमजोर दिख रही है।”
उनके मुताबिक निफ्टी के लिए 24,600 का स्तर अहम सपोर्ट है। यदि यह स्तर टूटता है तो गिरावट और तेज हो सकती है। वहीं 25,000 का स्तर बाजार के लिए निकटतम रुकावट माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा पर गहरा असर डाला है और फिलहाल बाजार में अस्थिरता बने रहने के संकेत मिल रहे हैं।
