तेहरान: अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद पूरे ईरान में गुस्से की लहर दौड़ गई है। सत्ता के गलियारों से लेकर सैन्य प्रतिष्ठान तक बदले की खुली चेतावनियां दी जा रही हैं।
ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा संस्था Supreme National Security Council के सचिव अली लारीजानी ने अमेरिका को सीधे निशाने पर लेते हुए तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “अमेरिकियों ने ईरानी लोगों के दिल में छुरा घोंपा है और हम उनके दिल में छुरा घोंपेंगे।” लारीजानी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि ईरानी सेना की प्रतिक्रिया और भी ज्यादा शक्तिशाली होगी।
उन्होंने कहा, “उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि वे हमला करके बच नहीं सकते। जवाब ऐसा होगा जिसे वे याद रखेंगे।”
अस्थायी नेतृत्व संरचना की तैयारी
लारीजानी, जो खामेनेई के करीबी सलाहकार माने जाते थे, ने यह भी संकेत दिया कि देश में जल्द ही अस्थायी नेतृत्व व्यवस्था बनाई जाएगी। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति और न्यायपालिका प्रमुख की अगुवाई में एक टेम्पररी लीडरशिप स्ट्रक्चर गठित किया जाएगा, ताकि सत्ता संचालन में कोई खालीपन न रहे।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान क्षेत्रीय देशों से युद्ध नहीं चाहता, लेकिन मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना जारी रखेगा। “यह हमेशा के लिए स्पष्ट कर देना चाहिए कि अमेरिका ईरान को डरा-धमका नहीं सकता,” उन्होंने दोहराया।
फारस की खाड़ी में अमेरिकी वॉरशिप पर रोक की चेतावनी
ईरान की सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, Islamic Revolutionary Guard Corps (आईआरजीसी) के पूर्व शीर्ष कमांडर मोशेन रेजाई ने ऐलान किया है कि किसी भी अमेरिकी युद्धपोत को फारस की खाड़ी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
रेजाई का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियां बढ़ी हुई हैं और टकराव की आशंका तेज हो गई है।
रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख की भी मौत की पुष्टि
ईरानी सरकारी मीडिया ने शनिवार को पुष्टि की कि हमलों में देश के रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह और सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ भी मारे गए हैं। इससे पहले आईआरजीसी के प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद पाकपुर और डिफेंस काउंसिल के सचिव अली शमखानी की मौत की पुष्टि की जा चुकी है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा
लगातार शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के मारे जाने से ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की, तो मिडिल ईस्ट में व्यापक युद्ध छिड़ सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ेगा।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें तेहरान और वॉशिंगटन पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में ईरान की प्रतिक्रिया किस स्तर की होगी, यह तय करेगा कि यह संकट सीमित रहेगा या वैश्विक संघर्ष का रूप ले लेगा।
