हल्द्वानी: सवर्ण शक्ति संगठन (उत्तराखंड) की ओर से यूजीसी की नई गाइडलाइन को लेकर तीखा विरोध जताया गया। संगठन के संयोजक प्रकाश हर्बोला ने पत्रकार वार्ता कर इसे “काला कानून” बताते हुए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया। पत्रकार वार्ता में सहसंयोजक भुवन भट्ट, सदस्य जगत सिंह बिष्ट, मनोज अग्रवाल, तरुण वानखेड़े सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
गाइडलाइन में एकतरफा प्रावधान : प्रकाश हर्बोला
प्रकाश हर्बोला ने आरोप लगाया कि यूजीसी की गाइडलाइन में भेदभावपूर्ण प्रावधान हैं। उनका कहना था कि यदि किसी के खिलाफ शिकायत दर्ज होती है तो तुरंत कार्रवाई हो सकती है, लेकिन झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ कोई स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि इससे निर्दोष व्यक्ति का करियर बर्बाद हो सकता है और उसकी जिम्मेदारी तय नहीं होती। उन्होंने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि क्या भविष्य में भी यही नीति जारी रहेगी।
हर्बोला ने यह भी आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के रोहित वेमुला मामले के संदर्भ में दी गई दिशा-निर्देशों से आगे बढ़कर ओबीसी वर्ग को भी शामिल किया गया, जबकि अदालत ने ऐसा स्पष्ट रूप से नहीं कहा था।
“शिक्षा संस्थान डर के नहीं, संवाद के केंद्र हों”
सहसंयोजक भुवन भट्ट ने कहा कि संगठन किसी वर्ग के खिलाफ नहीं है, लेकिन शिकायत तंत्र में निष्पक्षता जरूरी है। उन्होंने मांग की कि सभी छात्रों के लिए समान और संतुलित शिकायत प्रणाली बने, जिसमें अपील का स्पष्ट प्रावधान हो।
उनका कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में इक्विटी बोर्ड के फैसले के खिलाफ अपील की व्यवस्था स्पष्ट नहीं है, जो न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों में जातिगत तनाव बढ़ाने के बजाय समावेशी और संतुलित वातावरण होना चाहिए।
21 को आक्रोश महारैली
संगठन ने घोषणा की कि 21 तारीख को रामलीला मैदान हल्द्वानी में एकत्रित होकर आक्रोश महारैली निकाली जाएगी, जो डीएम कार्यालय तक जाएगी। वहां जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
वार्ता में जगत सिंह बिष्ट, त्रिलोक सिंह बिष्ट, तरुण वानखेड़े, मनोज अग्रवाल, प्रताप जोशी, योगेंद्र भट्ट सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
