आर्य समाज हल्द्वानी में श्रावणी उपाकर्म एवं वेद प्रचार कार्यक्रम का समापन, वैदिक यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
हल्द्वानी। समाज में अच्छाई को बढ़ावा देना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी बुराई का मजबूती से विरोध करना भी है। यदि समाज बुराई का विरोध करना छोड़ दे तो धीरे-धीरे वही बुराई स्वीकार्य होकर अच्छाई का रूप लेने लगती है। यह बात कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत ने आर्य समाज हल्द्वानी में आयोजित श्रावणी उपाकर्म एवं वेद प्रचार कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कही।
आर्य समाज हल्द्वानी में 3 सितंबर से चल रहे वैदिक कार्यक्रम का रविवार को वैदिक यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ विधिवत समापन हुआ। इस दौरान वैदिक विचारधारा, राष्ट्र निर्माण, नारी शक्ति, युवा शक्ति और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन जैसे विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में नगर के गणमान्य नागरिकों, आर्य समाज के पदाधिकारियों और विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
‘बुराई का विरोध नहीं किया तो वह अच्छाई के रूप में स्थापित हो जाएगी’
मुख्य अतिथि बंशीधर भगत ने कहा कि समाज में सज्जनों की भूमिका केवल अच्छाई का समर्थन करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सज्जनों का दायित्व बुराई का दृढ़ता से विरोध करना भी है। उन्होंने कहा कि बुराई का विरोध करने की वास्तविक शक्ति समाज के पास ही होती है। जब समाज किसी गलत बात का विरोध करना बंद कर देता है तो वही गलत बात धीरे-धीरे सामान्य और स्वीकार्य बन जाती है।
उन्होंने आर्य समाज की भूमिका की चर्चा करते हुए कहा कि स्थापना काल से ही आर्य समाज समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वास और बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाता रहा है। साथ ही उसने वेदों के ज्ञान और अच्छाई के विचारों को समाज तक पहुंचाने का कार्य किया है।
भगत ने कहा कि सनातन धर्म के मूल वेदों के ज्ञान का प्रचार-प्रसार आर्य समाज का प्रमुख उद्देश्य रहा है। महर्षि दयानंद सरस्वती ने समाज को जातिवाद जैसी कुरीतियों से मुक्त करने और सभी मनुष्यों को समान मानने का संदेश दिया था।
‘युवा ही राष्ट्र के भविष्य का आधार’
कार्यक्रम के दौरान आयोजित भाषण प्रतियोगिता के विषय ‘राष्ट्र के उद्धार के मूल तत्व’ का उल्लेख करते हुए बंशीधर भगत ने प्रतिभागी विद्यार्थियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बालक-बालिकाओं ने राष्ट्र की उन्नति और रक्षा से जुड़े व्यावहारिक विषयों को जिस तरह प्रस्तुत किया, वह प्रशंसनीय है।
उन्होंने कहा कि देश का भविष्य आज के युवाओं के हाथ में है। युवाओं में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी, अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करना समय की आवश्यकता है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने का अवसर मिलता है।
आचार्य चंद्रदेव बोले- ‘भारतीय संस्कृति में नारी को मिला है सर्वोच्च सम्मान’
फर्रुखाबाद से पहुंचे अंतरराष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ता आचार्य चंद्रदेव ने भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपरा में नारी के स्थान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को अत्यंत सम्मानजनक स्थान दिया गया है। वेद में कहा गया है— ‘स्त्री ब्रह्मा बभूविथ’, अर्थात मातृशक्ति समाज के निर्माण में ब्रह्मा के समान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में धन की देवी लक्ष्मी, विद्या की देवी सरस्वती और शक्ति की देवी दुर्गा के रूप में नारी शक्ति को सम्मान दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि समाज में धन, ज्ञान और शक्ति के महत्व को भी दर्शाते हैं।
आचार्य चंद्रदेव ने भारतीय वैदिक परंपरा को स्त्री-विरोधी बताने वाले विचारों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वेदों और सनातन परंपरा के इतिहास का अध्ययन आवश्यक है। बिना समुचित ज्ञान के इस तरह की धारणाएं बनाना उचित नहीं है।
‘वैदिक विचारधारा में राष्ट्र सर्वोपरि’
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव एवं आर्य समाज के प्रवक्ता प्रो. विनय विद्यालंकार ने वैदिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वेद और वैदिक साहित्य में राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए उसके विकास और समृद्धि की कामना की गई है।
उन्होंने वैदिक राष्ट्रीय प्रार्थना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें किसी एक देश तक सीमित भावना नहीं, बल्कि समस्त राष्ट्रों की उन्नति की कामना निहित है। उन्होंने बताया कि वैदिक परंपरा में राष्ट्र को आगे बढ़ाकर धारण करने वाली शक्ति रखने वाली देवी के लिए ‘पुरन्धि’ शब्द का प्रयोग किया गया है।
प्रो. विद्यालंकार ने कहा कि वैदिक विचारधारा में युवा शक्ति को राष्ट्र की आधारभूत शक्ति माना गया है, जबकि धन और वैभव को राष्ट्र निर्माण के लिए साधन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसलिए वैदिक राष्ट्रभावना को केवल भारत तक सीमित न मानकर विश्व के सभी राष्ट्रों के लिए उपयोगी और प्रासंगिक माना जा सकता है।
वैदिक यज्ञ की पूर्णाहुति, भजनों ने बांधा समां
आर्य समाज हल्द्वानी में 3 सितंबर से चल रहे वैदिक यज्ञ की पूर्णाहुति भी कार्यक्रम के दौरान विधिवत संपन्न हुई। नगर के गणमान्य नागरिकों और आर्य समाज से जुड़े लोगों ने पूर्णाहुति में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
आर्य समाज के धर्माचार्य विनोद आर्य ने विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराया। वहीं पंडित भीष्म देव ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनके भजनों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
भाषण प्रतियोगिता में आरंभ दुमका ने मारी बाजी
कार्यक्रम के दौरान हल्द्वानी के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए निबंध और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र की उन्नति से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता में डीपीएस हल्द्वानी के आरंभ दुमका ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वीर शिवा स्कूल की तनीषा जोशी ने द्वितीय और डीएवी हल्द्वानी की सोनिया जोशी ने तृतीय स्थान हासिल किया।
इसके अलावा निबंध प्रतियोगिता का आयोजन कनिष्ठ एवं वरिष्ठ वर्ग में किया गया, जिसमें शहर के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को वैदिक संस्कृति, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक दायित्वों जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर मिला।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में आर्य समाज के प्रधान प्रो. (डॉ.) विनय कुमार खुल्लर, मंत्री प्रो. विनय विद्यालंकार, कोषाध्यक्ष कृष्णकांत अग्रवाल, उपमंत्री रणजीत यादव, उपप्रधान ढालकुमारी शर्मा, कमलेश भारद्वाज, पी.एल. आर्य, राजकुमार राजौरिया, अनुजकांत खंडेलवाल, संतोष भट्ट, अरविंद कुशवाहा, सुरेश जायसवाल, कैप्टन प्रकाश जोशी, विशाल सिंघल, गरिमा सिंघल, हरीशचंद्र पंत, सावित्री पंत, दुर्गा प्रसाद त्रिपाठी, बी.सी. अधिकारी, अरविंद मलिक, आर.के. माहेश्वरी, मुकेश खन्ना, डॉ. अतुल राजपाल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
