सस्ता गल्ला दुकानों में मिलने वाला सरकारी नमक जांच में फेल…रेत-बालू मिले, वितरण पर रोक

खबर शेयर करें

हल्द्वानी। उत्तराखंड में सस्ता गल्ला दुकानों पर मिलने वाला सरकारी नमक सेहत के लिए सुरक्षित नहीं पाया गया है। रुद्रपुर स्थित राजकीय खाद्य एवं औषधि सुरक्षा प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में नमक के कई सैंपलों में रेत और बालू के कण मिलने की पुष्टि हुई है। इसके बाद विभाग ने संबंधित कंपनी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 46(4) में कार्रवाई करते हुए सरकारी नमक के वितरण पर रोक लगा दी है।

कैसे खुला मामला?
कुछ दिन पहले हल्द्वानी के सरकारी राशन वितरण केंद्र का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें नमक में रेत जैसे कण साफ दिख रहे थे। मामला सामने आने के बाद आम जनता में नाराजगी फैल गई। वीडियो प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत संज्ञान लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग को जांच के निर्देश दिए।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: सिमली–गैरसैंण मार्ग पर बड़ा हादसा टला, खाई में गिरने से बाल-बाल बची हरियाणा के यात्रियों की कार

कुमाऊं के 36 से अधिक सैंपल लिए गए
जांच टीम ने कुमाऊं मंडल के विभिन्न जिलों से सरकारी नमक के तीन दर्जन से ज्यादा सैंपल एकत्र किए। ये सभी नमूने सीएम नमक पोषण योजना के तहत मिलने वाले नमक के थे, जिसे राष्ट्रीय खाद्य योजना के लाभार्थियों को 8 रुपये में वितरित किया जाता है।

यह भी पढ़ें 👉  नवजातों को सांस देने की तकनीक सिखाने हल्द्वानी में जुटे विशेषज्ञ, 2030 तक मृत्यु दर घटाने का लक्ष्य

10 सैंपल जांच में फेल
रुद्रपुर स्थित स्टेट लैब की रिपोर्ट में 10 नमक सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। रिपोर्ट के अनुसार—

  • नमक में रेत और बालू के कण पाए गए
  • नमक खाने योग्य नहीं पाया गया
  • आयोडीन व अन्य पोषक तत्व मानक के अनुरूप मिले

फिल्टरेशन प्रक्रिया ठीक न होने के कारण नमक में बाहरी कण मिलने की आशंका जताई गई है।

विभागीय कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग ने दोषी कंपनी पर कार्रवाई करते हुए नमक वितरण को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। आरएस कठायत, उपायुक्त खाद्य सुरक्षा, कुमाऊं मंडल के अनुसार “कुल 36 से अधिक नमूनों में से 10 नमूनों में बाहरी कण मिले हैं। संबंधित कंपनी पर धारा 46(4) के तहत कार्रवाई की गई है और नमक वितरण रोका गया है।”

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी: बीच रास्ते में खराब हुई रोडवेज बस, दो घंटे इंतजार के बाद भी नहीं मिला आराम, पर्यटकों ने जताई नाराजगी

यह घटना सरकारी योजनाओं में वितरित होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिससे आम जनता की सेहत पर खतरा बढ़ सकता है।