Uttarakhand: टैक्स चोरी के खेल से ‘जीरो टॉलरेंस’ पर सवाल, सिस्टम की मिलीभगत से सरकार को रोजाना लाखों का चूना

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हल्द्वानी/रुद्रपुर। उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं मंडल में बड़े सिंडिकेट का रूप ले चुके टैक्स चोरी के खेल से प्रदेश सरकार और राज्य कर विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल उठ रहे हैं। दावे किये जाते हैं कि टैक्स चोरी या नियमों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जायेगी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।

बाहरी राज्यों से कथित ट्रांसपोर्ट एजेसियों माध्यम से रोजाना परचून, कपड़ा, जूता, कॉस्मैटिक तथा गुटखा (तंबाकू) का माल लेकर बड़े-बड़े ट्रक उत्तराखंड राज्य की सीमाओं में प्रवेश करते हैं, इन वाहनों में ज्यादातर माल टैक्स चोरी कर लाया जाता है। सबसे अहम बात यह है कि इस पूरे खेल की भनक विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई का अभाव साफ नजर आता है।

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सूत्रों के अनुसार बरेली, दिल्ली, गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश से टैक्स चोरी कर लाये जाने वाला माल उत्तराखंड की सीमा को पार कर सबसे पहले रुद्रपुर, किच्छा और काशीपुर की कथित ट्रांसपोर्टों में उतरता है। जिसके बाद इस टैक्स चोरी के माल को अन्य छोटे-बड़े वाहनों के जरिये हल्द्वानी की कथित ट्रांसपोर्ट एजेसियों में पहुंचाकर अन्य वाहनों के माध्यम से पहाड़ तक भेजा जाता है।

यह बताया जाता है कि बरेली से आने वाला कुछ माल रुद्रपुर और किच्छा से होकर सीधे हल्द्वानी की ट्रांसपोर्टों में पहुंचता है। सूत्र बताते हैं कि जब कभी विभागीय कार्रवाई होती है तो विभाग के ही कुछ अधिकारी-कर्मचारी कथित ट्रांसपोर्टरों को पहले ही सूचना देकर लोकेशन के जरिये अलर्ट कर देते हैं। जिससे कार्रवाई के दौरान कुछ भी हाथ नहीं लगता है।

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यूं तो दावे किये जाते हैं कि राज्य कर विभाग की जांच टीमें दिन-रात उत्तराखंड की सीमा पर वाहनों की चेकिंग करती रहती हैं। लेकिन जिस तरह से टैक्स चोरी का माल ट्रकों के जरिये कथित ट्रांसपोर्ट एजेंटों के गोदामों तक पहुंच रहा है, उससे जांच टीमों और विभागीय अधिकारीयों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है।

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सूत्र बताते हैं कि टैक्स चोरी का यह खेल परचून, कपड़ा, जूता, कॉस्मैटिक तथा गुटखा (तंबाकू) के अलावा ईंट और स्क्रैप तक फैला हुआ है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि टैक्स चोरी का दायरा कितना व्यापक हो चुका है। इसमें राज्य कर विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत होने की भी संभावना है। इससे जहां राज्य की धामी सरकार को रोजाना लाखों रुपये के कर चोरी से राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। वहीं, सरकार के जीरो टॉलरेंस के दावों पर भी पलीता लग रहा है।

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