अमेरिकी टैरिफ से भारत को फायदा, इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

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नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा चीन, वियतनाम, थाईलैंड और इंडोनेशिया पर भारत की तुलना में अधिक जवाबी टैरिफ लगाए जाने से भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को बड़ा फायदा हो सकता है। इन देशों को भारत का प्रमुख प्रतिस्पर्धी माना जाता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह स्थिति भारत के लिए वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने का सुनहरा अवसर है।

व्यापार समझौता बना गेमचेंजर
इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने कहा कि अमेरिका के साथ भारत का व्यापार द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के सफल समापन पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा, “अब हमारी व्यापार रणनीति का आधार बीटीए होना चाहिए, जिससे स्थिर बाजार पहुंच और उच्च मूल्य वाले इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को बढ़ावा मिल सके।”

भारत की रणनीति होगी अहम
इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) के अध्यक्ष अशोक चांडक ने बताया कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता से दबाव कम हो सकता है, जबकि चुनिंदा अमेरिकी उत्पादों पर आयात शुल्क में समायोजन से भी समाधान निकल सकता है। उन्होंने कहा, “भारत को अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए संतुलित रणनीति अपनाने की जरूरत है।”

500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और अमेरिका अपने द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने की योजना बना रहे हैं। इससे पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौतों की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। सेमीकंडक्टर और फार्मा सेक्टर को टैरिफ से छूट मिलने से भारत की स्थिति और मजबूत होगी।

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वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ेगी भारत की भूमिका
साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) के वाइस प्रेसिडेंट प्रभु राम ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव से भारत को एक मजबूत स्थान बनाने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा, “भारत को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए रणनीतिक नीतिगत पहलें तेज करनी होंगी, ताकि यह अवसर पूरी तरह भुनाया जा सके।”

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को व्यापार कूटनीति, घरेलू नीतिगत सुधार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए तेजी से निर्णय लेने होंगे, जिससे देश इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर सके।

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