नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने को-ऑपरेटिव सेक्टर को मजबूती देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए नेशनल को-ऑपरेटिव फेडरेशन से मिलने वाली डिविडेंड आय पर तीन साल की टैक्स छूट देने का ऐलान किया है। यह घोषणा बुधवार को लोकसभा में वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने की।
वित्त मंत्री ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य को-ऑपरेटिव संस्थाओं में कम हिस्सेदारी रखने वाले सदस्यों को प्रोत्साहित करना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़ें और इसकी पहुंच बढ़े। उन्होंने कहा कि को-ऑपरेटिव, एमएसएमई और किसान देश की अर्थव्यवस्था को गति देने और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फाइनेंस बिल पर चर्चा के दौरान Nirmala Sitharaman ने कहा कि समावेशी विकास के लिए लघु एवं मध्यम उद्यमों, किसानों और सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र विशेष रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराते हैं।
वित्त मंत्री ने डेटा सेंटर सेवाओं से जुड़े नए प्रावधान की भी जानकारी दी। इसके तहत सेफ हार्बर नियम में संशोधन कर संबंधित विदेशी संस्थाओं को सेवाएं देने वाली भारतीय कंपनियों को लागत पर 15 प्रतिशत का मार्जिन निर्धारित किया गया है। उनका कहना है कि इससे वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और फर्जी कंपनियों के निर्माण पर रोक लगेगी।
सरकारी वित्त को लेकर उठ रही चिंताओं पर Nirmala Sitharaman ने स्पष्ट किया कि कुछ मामलों में केंद्र सरकार ने उपकर और अधिभार से प्राप्त राशि से अधिक खर्च किया है, जिससे यह साबित होता है कि संसाधनों का उपयोग जनकल्याण के लिए किया जा रहा है।
इसके अलावा, तकनीकी चूक पर लगने वाले जुर्माने को अब निश्चित शुल्क में बदला जाएगा, जिससे कारोबारियों के लिए अनिश्चितता कम होगी और अनुपालन प्रक्रिया आसान बनेगी।
सरकार ने हवाई अड्डों पर विवाद कम करने और यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए यात्री भत्तों को भी युक्तिसंगत बनाने का निर्णय लिया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इन सभी उपायों का उद्देश्य प्रमुख क्षेत्रों को सशक्त करना, व्यापार करने में आसानी बढ़ाना और आर्थिक विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है।
