वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बड़ा और सख्त बयान देकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। दो हफ्तों के युद्धविराम के बाद ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को हर हाल में फिर से खोला जाएगा—चाहे इसके लिए ईरान की सहमति मिले या नहीं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है और जरूरत पड़ने पर एकतरफा कदम भी उठाएगा।
जॉइंट बेस एंड्रयूज में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि ईरान सैन्य मोर्चे पर कमजोर पड़ चुका है और अब अमेरिका क्षेत्रीय हालात को अपने नियंत्रण में लेने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा, “ईरान चाहे समझौता करे या नहीं, होर्मुज खुला रहेगा। अमेरिका वहां मौजूद रहेगा और दुनिया को ऊर्जा आपूर्ति बाधित नहीं होने देगा।” यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। लगभग दुनिया के पांचवें हिस्से का तेल व्यापार इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। (Al Jazeera)
ट्रंप का यह बयान उस वक्त आया जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद रवाना हुए। ट्रंप ने वेंस को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके सामने “बहुत बड़ा काम” है और यह मिशन पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा तय करेगा।
उधर पाकिस्तान की राजधानी Islamabad इस समय वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनी हुई है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता शुरू हो चुकी है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल की कमान Mohammad Bagher Ghalibaf के हाथों में है। दोनों पक्षों के बीच यह वार्ता पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने की दिशा में बेहद अहम मानी जा रही है। (Deccan Herald)
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने वार्ता के लिए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा है, जिसमें विदेश मंत्री Abbas Araghchi, रक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारी और आर्थिक मामलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि ईरान इस बातचीत को केवल सैन्य नहीं बल्कि व्यापक रणनीतिक और आर्थिक समझौते के रूप में देख रहा है।
हालांकि वार्ता शुरू होने से पहले ही ईरान ने अपनी सख्त शर्तें सामने रख दी हैं। तेहरान ने साफ कहा है कि अगर उसकी पूर्व शर्तें पूरी नहीं की गईं, तो बातचीत का कोई मतलब नहीं रहेगा। ईरान की मांग है कि लेबनान में युद्धविराम सुनिश्चित किया जाए और ईरानी संपत्तियों पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जाए, तभी आगे की बातचीत सार्थक हो सकेगी। (The Times of Israel)
विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामाबाद में हो रही यह वार्ता आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की राजनीति की दिशा तय कर सकती है। अगर समझौता होता है तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है, लेकिन यदि वार्ता विफल रहती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और गहरा सकता है।
दुनिया की नजर अब इस्लामाबाद में चल रही इस हाई-वोल्टेज बातचीत पर टिकी है, क्योंकि इसके नतीजे न सिर्फ अमेरिका-ईरान संबंधों बल्कि वैश्विक तेल बाजार और पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।
