कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया में मोटापा अब केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। सरकार की ओर से जारी एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश में लगभग हर तीन में से एक वयस्क मोटापे से ग्रस्त है। चिंताजनक बात यह है कि मोटापे की समस्या न केवल वयस्कों बल्कि बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है।
Australian Institute of Health and Welfare (एआईएचडब्ल्यू) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022-24 के दौरान 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के 32.8 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई वयस्क मोटापे का शिकार पाए गए। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में लगातार बढ़ोतरी दर्शाता है। वर्ष 2017-18 में यह दर 31.3 प्रतिशत थी, जबकि 2014-15 में 27.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
दो-तिहाई वयस्क सामान्य वजन से अधिक
रिपोर्ट के अनुसार स्थिति और भी गंभीर तब नजर आती है जब अधिक वजन वाले लोगों को भी इसमें शामिल किया जाता है। वर्ष 2022-24 में 67.1 प्रतिशत वयस्क या तो मोटापे से ग्रस्त थे या उनका वजन सामान्य स्तर से अधिक था। यानी ऑस्ट्रेलिया की दो-तिहाई से अधिक वयस्क आबादी वजन संबंधी समस्याओं से जूझ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति भविष्य में मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में और वृद्धि कर सकती है।
गंभीर मोटापे के मामले भी बढ़े
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गंभीर मोटापे (सीवियर ओबेसिटी) के मामलों में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-24 में 13 प्रतिशत वयस्क गंभीर मोटापे की श्रेणी में पाए गए, जबकि 2017-18 में यह आंकड़ा 11.7 प्रतिशत था।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गंभीर मोटापा व्यक्ति की जीवन गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है और कई जटिल स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
पुरुषों में अधिक वजन, महिलाओं में गंभीर मोटापा ज्यादा
अध्ययन में लिंग आधारित अंतर भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों में अधिक वजन या मोटापे की संभावना महिलाओं की तुलना में अधिक पाई गई। हालांकि गंभीर मोटापे के मामलों में महिलाएं पुरुषों से आगे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनशैली, खानपान, शारीरिक गतिविधियों में कमी, हार्मोनल बदलाव और सामाजिक कारक इस अंतर के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बीमारी और मौत का सबसे बड़ा जोखिम कारक बना मोटापा
एआईएचडब्ल्यू की प्रवक्ता एमी यंग ने कहा कि मोटापा और अधिक वजन ऑस्ट्रेलिया के सामने तेजी से बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुके हैं।
उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में मोटापा और अधिक वजन देश में बीमारी और समयपूर्व मृत्यु का सबसे बड़ा जोखिम कारक बन गया है। यह स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि इसने लंबे समय तक प्रमुख जोखिम कारक रहे तंबाकू सेवन को भी पीछे छोड़ दिया है।
बच्चों में भी बढ़ रही चिंता
रिपोर्ट में बच्चों की स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। 5 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 28.1 प्रतिशत बच्चे वर्ष 2022-24 में अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त पाए गए। वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा 24.9 प्रतिशत था।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में बढ़ता मोटापा भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। बच्चों में शारीरिक गतिविधियों में कमी, स्क्रीन टाइम में बढ़ोतरी और असंतुलित खानपान को इसके प्रमुख कारणों में माना जा रहा है।
इलाज पर अरबों डॉलर का खर्च
मोटापे का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका आर्थिक बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में ऑस्ट्रेलिया ने मोटापे के उपचार पर लगभग 800 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर खर्च किए।
इसके अलावा मोटापे और अधिक वजन से जुड़ी बीमारियों के इलाज पर करीब 10 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का अतिरिक्त खर्च आया। यह राशि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को दर्शाती है।
क्या है मोटापा?
विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा एक जटिल और दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें शरीर में अत्यधिक वसा जमा हो जाती है। इससे हृदय रोग, टाइप-2 मधुमेह, स्ट्रोक, कुछ प्रकार के कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
World Health Organization के अनुसार मोटापा मुख्य रूप से शरीर में ली जाने वाली और खर्च की जाने वाली ऊर्जा (कैलोरी) के बीच असंतुलन के कारण विकसित होता है। हालांकि आनुवंशिक, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस बढ़ती समस्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में यह ऑस्ट्रेलिया की स्वास्थ्य प्रणाली और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

