हल्द्वानी में कोलोरेक्टल कैंसर जागरूकता सत्र आयोजित, मरीज की प्रेरणादायक कहानी ने दिया नया संदेश

खबर शेयर करें

हल्द्वानी: कोलोरेक्टल कैंसर से पीड़ित लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली ने एक पेशेंट सेंट्रिक जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के दौरान हल्द्वानी के 56 वर्षीय कुंदन सिंह की प्रेरणादायक यात्रा साझा की गई, जिन्होंने स्टेज-2 कोलोरेक्टल कैंसर को मात देकर नया जीवन प्राप्त किया।

कोलोरेक्टल कैंसर: एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या

कोलोरेक्टल कैंसर वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे आम कैंसर है और कैंसर से होने वाली मौतों का दूसरा प्रमुख कारण है। इस घातक बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मार्च माह को नेशनल कोलोरेक्टल कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है। इसी अवसर पर आयोजित इस सत्र में मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (जीआई और एचपीबी) विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. विवेक मंगला ने भाग लिया और कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती पहचान व उपचार के महत्व पर प्रकाश डाला।

यह भी पढ़ें 👉  महंगा हुआ माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने का सपना, परमिट शुल्क में 36% की बढ़ोतरी

न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी से कैंसर पर जीत

श्री कुंदन सिंह के मामले पर चर्चा करते हुए डॉ. मंगला ने बताया, “श्री सिंह को प्रारंभ में रेक्टल ब्लीडिंग की समस्या हुई, जिसके बाद जांच में उन्हें स्टेज-2 कोलन कैंसर और मल्टीपल पॉलीप्स का पता चला। उनकी आंत के कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाने के लिए न्यूनतम इनवेसिव लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई।”

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: विधायकों, मंत्रियों और अधिकारियों के घरों पर लगेंगे स्मार्ट मीटर, सीएम धामी ने दिए निर्देश

सर्जरी के बाद, कैंसर कोशिकाओं को पूरी तरह नष्ट करने और पुनरावृत्ति रोकने के लिए एडजुवेंट कीमोथेरेपी दी गई। अंतिम चरण में इलियोस्टोमी क्लोजर किया गया, जिससे वे सामान्य जीवन जीने में सक्षम हो सके। आज श्री सिंह पूरी तरह स्वस्थ हैं और कैंसर-मुक्त जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

समय पर जांच से बचाव संभव

डॉ. मंगला ने कहा, “यदि कोलोरेक्टल कैंसर का पता प्रारंभिक अवस्था में चल जाए, तो यह पूरी तरह से उपचार योग्य होता है। सफल उपचार के बाद भी नियमित जांच आवश्यक है ताकि किसी भी संभावित पुनरावृत्ति या नए पॉलीप्स का समय रहते पता लगाया जा सके।”

यह भी पढ़ें 👉  आईआईटीयन से बने "इंजीनियर बाबा", कुंभ में आध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र

उन्होंने 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को नियमित कोलोनोस्कोपी करवाने और रेक्टल ब्लीडिंग जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करने की सलाह दी। शीघ्र पहचान और समय पर हस्तक्षेप से कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है, जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।

इस जागरूकता सत्र ने उपस्थित लोगों को कोलोरेक्टल कैंसर के प्रति सतर्क रहने और समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित किया।