हल्द्वानी/रुद्रपुर। कुमाऊं मंडल के रुद्रपुर, किच्छा, काशीपुर और हल्द्वानी में कथित ट्रांसपोर्टों की आड़ में चल रही टैक्स चोरी की खबरों से राज्य कर विभाग में भले ही हलचल मची हो, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई लगभग शून्य बनी हुई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, दिखावे के लिए उन वाहनों की चेकिंग की जा रही है जो पहले से ही पक्के बिल और दस्तावेजों के साथ माल ढो रहे हैं। हालांकि कहीं-कहीं मामूली अनियमितताएं मिलने पर कार्रवाई भी की जा रही है, लेकिन बड़े स्तर पर हो रही टैक्स चोरी पर कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा।
बताया जा रहा है कि बड़े ट्रकों के जरिए बिना टैक्स का माल खुलेआम कथित ट्रांसपोर्टों तक पहुंच रहा है, लेकिन इस पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही। सूत्रों का कहना है कि इस पूरे खेल को बढ़ावा देने में विभाग के कुछ कथित अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ रही है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली और छवि दोनों पर सवाल उठने लगे हैं।
चर्चा है कि स्थानीय स्तर के साथ-साथ अब कुछ उच्च अधिकारियों के नाम भी इस मामले में सामने आने लगे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े करता है।
जानकारी के अनुसार, परचून, गुटका (तंबाकू), स्क्रैप (कबाड़) और ईंट के कारोबार की आड़ में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी शासन से लेकर स्थानीय स्तर तक कई अधिकारियों और कर्मचारियों को है, जिसे कुछ लोग स्वीकार भी कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
सूत्र बताते हैं कि टैक्स चोरी में शामिल कथित बड़े ट्रांसपोर्टर अपनी अवैध कमाई का एक हिस्सा कमीशन के रूप में विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाते हैं। इसी कारण कई बार प्रस्तावित बड़ी कार्रवाई से पहले ही सूचना लीक हो जाती है, जिससे संबंधित कारोबारी सतर्क हो जाते हैं और कार्रवाई बेअसर साबित होती है।
उत्तराखंड सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बीच सामने आ रही ये स्थिति न केवल प्रशासनिक सख्ती पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारियों के हितों को भी प्रभावित कर रही है।
