सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम के दुरुपयोग पर जताई गंभीर चिंता, किशोर प्रेम संबंधों के लिए सुझाया ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’

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टीनएज लव और अपराधीकरण का संकट: अदालत ने केंद्र को दी क्लॉज पर विचार करने की सिफारिश, हाईकोर्ट के निर्देशों को भी रद्द किया

नई दिल्ली। बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाए गए पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए एक ‘पवित्र’ और नेक इरादे का प्रतीक है, लेकिन कई मामलों में इसका इस्तेमाल बदले की भावना और निजी दुश्मनी निकालने के लिए हथियार की तरह किया जा रहा है।

Suggests ‘Romeo-Juliet Clause’ to Prevent Misuse of POCSO Act: न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि देश भर में ऐसे मामले बढ़ रहे हैं जहां किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने रिश्तों को कठोर आपराधिक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है। अक्सर परिवार की नाराजगी के चलते लड़की की उम्र 18 से कम बताकर लड़के पर पॉक्सो की गंभीर धाराएं लगा दी जाती हैं। अदालत ने सुझाव दिया कि वास्तविक किशोर प्रेम संबंधों को कानून की कठोरता से बचाने के लिए ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ पर विचार होना चाहिए। यह क्लॉज उन मामलों में राहत देगा जहां दोनों पक्ष सहमति से रिश्ते में हों और उनकी उम्र में मामूली अंतर हो।

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सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के एक मामले (राज्य बनाम अनुरुद्ध) में आई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए आदेश दिए थे कि पॉक्सो मामलों की जांच की शुरुआत में ही पीड़िता का मेडिकल एज टेस्ट अनिवार्य हो और स्कूल प्रमाण पत्रों पर संदेह होने पर अदालतें सख्त रुख अपनाएं। सुप्रीम कोर्ट ने इन निर्देशों को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान अदालतें ‘मिनी ट्रायल’ नहीं चला सकतीं और जांच प्रक्रिया के लिए ऐसे सामान्य निर्देश जारी नहीं कर सकतीं। उम्र तय करने की प्रक्रिया जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में पहले से निर्धारित है।

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अदालत ने पॉक्सो अधिनियम के दुरुपयोग से समाज में पैदा हुई असमानता की ओर भी इशारा किया। पीठ ने कहा कि एक ओर वे बच्चे हैं जिन्हें वास्तविक संरक्षण की जरूरत है, लेकिन गरीबी और सामाजिक कलंक के कारण वे न्याय तक नहीं पहुंच पाते। वहीं दूसरी ओर, साधन संपन्न लोग कानून का इस्तेमाल अपने फायदे और बदले के लिए कर रहे हैं। कोर्ट ने वकीलों को भी नसीहत दी कि वे ‘फिल्टर’ की भूमिका निभाएं और बदले की भावना से प्रेरित मामले बिना जांच के दाखिल न करें।

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रोमियो-जूलियट क्लॉज क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाया कि ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ उन मामलों में लागू हो सकता है जहां दो किशोर आपसी सहमति से संबंध में हैं और उनकी उम्र में मामूली अंतर (2–4 साल) है। इस क्लॉज का उद्देश्य युवाओं को उनकी उम्र के प्राकृतिक आकर्षण या गलती के लिए आजीवन अपराधी घोषित होने से बचाना है। अदालत ने इस सुझाव की प्रति केंद्रीय विधि सचिव को भेजी है ताकि सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर सके।