नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हवाई यात्रा की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने विमानों में खतरनाक वस्तुओं के परिवहन से जुड़े नियमों में व्यापक संशोधन करते हुए नई जवाबदेही आधारित व्यवस्था लागू की है। नए प्रावधानों के तहत अब किसी भी चूक की स्थिति में सीधे जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
‘विमान (खतरनाक वस्तुओं का परिवहन) नियम, 2026’ को 17 फरवरी को हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद अधिसूचित किया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य, सुरक्षा, संपत्ति या पर्यावरण के लिए जोखिम पैदा करने वाली वस्तुओं—जैसे ज्वलनशील पदार्थ, विस्फोटक सामग्री, संपीड़ित गैसें या रासायनिक तत्व—को बिना घोषणा या गलत जानकारी देकर विमान में ले जाना गंभीर उल्लंघन माना जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नए नियमों के तहत भारतीय एयरलाइंस को अब खतरनाक वस्तुओं के परिवहन के लिए अनिवार्य रूप से नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से प्रमाणन प्राप्त करना होगा। वहीं विदेशी विमानन कंपनियों को भारत से या भारत के लिए ऐसी वस्तुएं ले जाने से पहले पूर्व-अनुमति लेनी होगी।
DGCA को विशेष अधिकार भी दिए गए हैं। यदि खतरनाक वस्तुओं के प्रबंधन, पैकेजिंग या दस्तावेजीकरण में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो वह जांच के आदेश दे सकेगा और संबंधित पक्षों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकेगा। जरूरत पड़ने पर संचालन पर रोक लगाने का अधिकार भी उसके पास होगा।
विमानन क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, वर्ष 2003 के पुराने नियम मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों के अनुरूप थे। हालांकि बदलते समय, बढ़ते हवाई यातायात और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए निगरानी तंत्र को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता थी।
सरकार का कहना है कि इन संशोधनों से हवाई यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी तथा एयरलाइंस कंपनियों को प्रशिक्षण, सुरक्षा प्रोटोकॉल और दस्तावेजीकरण में अधिक सतर्कता बरतनी होगी। यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि वे किसी भी प्रतिबंधित या खतरनाक वस्तु को बिना सही घोषणा के साथ न ले जाएं।
