मुंबई। नए साल के आठवें दिन हिंदी सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। गुजरे जमाने के दिग्गज अभिनेता और ‘जुबली कुमार’ के नाम से मशहूर राजेंद्र कुमार की पत्नी शुक्ला कुमार का निधन हो गया है। वह 80 के दशक के अभिनेता कुमार गौरव की मां थीं। 89 वर्ष की आयु में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। शुक्ला कुमार के निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है और सोशल मीडिया पर तमाम कलाकार व प्रशंसक उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
इस दुखद समाचार से बॉलीवुड सुपरस्टार संजय दत्त के परिवार में भी मातम पसरा हुआ है। दरअसल, शुक्ला कुमार और दत्त परिवार के बीच पारिवारिक संबंध थे। वह संजय दत्त की बहन नम्रता दत्त की सास थीं, जिससे दोनों परिवारों का रिश्ता और भी गहरा था।
लाइमलाइट से हमेशा रहीं दूर
शुक्ला कुमार भले ही हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर के सबसे लोकप्रिय अभिनेता राजेंद्र कुमार की जीवनसंगिनी थीं, लेकिन उन्होंने हमेशा खुद को चकाचौंध और लाइमलाइट से दूर रखा। सादगी भरा जीवन जीने वाली शुक्ला कुमार ने हिंदी सिनेमा के उतार-चढ़ाव और बदलावों को बेहद करीब से देखा। राजेंद्र कुमार और शुक्ला कुमार की जोड़ी को फिल्म जगत की सबसे सम्मानित और आदर्श जोड़ियों में गिना जाता था।
10 जनवरी को होगी प्रेयर मीट
परिवार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्ला कुमार के निधन के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हो पाया है। उनकी याद में 10 जनवरी को मुंबई में प्रेयर मीट (शोक सभा) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें परिवार, करीबी मित्र और फिल्म जगत की हस्तियां शामिल होंगी।
पति के जाने के 27 साल बाद कहा दुनिया को अलविदा
राजेंद्र कुमार और शुक्ला कुमार के तीन बच्चे हैं— बेटा कुमार गौरव और दो बेटियां डिंपल व मनोरमा। कुमार गौरव ने अपने पिता की तरह फिल्मों में करियर की शुरुआत की थी, हालांकि वह पिता जैसी ऐतिहासिक सफलता हासिल नहीं कर सके। उल्लेखनीय है कि राजेंद्र कुमार का निधन 1999 में हुआ था। पति के जाने के करीब 27 साल बाद अब शुक्ला कुमार भी इस दुनिया से विदा हो गईं।
फिर याद आया ‘जुबली कुमार’ का दौर
शुक्ला कुमार के निधन के साथ ही एक बार फिर सिनेप्रेमियों को राजेंद्र कुमार का सुनहरा दौर याद आ गया। राजेंद्र कुमार को उनकी फिल्मों के लगातार सिल्वर जुबली तक चलने के कारण ‘जुबली कुमार’ कहा जाता था। ‘मदर इंडिया’, ‘गूंज उठी शहनाई’, ‘संगम’, ‘आरजू’ और ‘मेरे महबूब’ जैसी कालजयी फिल्मों के जरिए उन्होंने हिंदी सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी थी।
शुक्ला कुमार के जाने से न सिर्फ एक परिवार, बल्कि हिंदी सिनेमा के एक पूरे युग की यादें भी नम आंखों के साथ ताजा हो गई हैं।
