तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सियासी और सैन्य हलचल तेज हो गई है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को पूरी तरह बंद नहीं करेगा, लेकिन अपने विरोधी देशों के लिए इसकी पहुंच सीमित रखेगा।
ईरान के प्रतिनिधि अली मौसवी ने कहा कि विदेशी जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति होगी, लेकिन इसके लिए उन्हें ईरान के साथ समन्वय करना अनिवार्य होगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि केवल मित्र देशों के जहाजों को ही निर्बाध आवाजाही की अनुमति दी जाएगी। मौसवी ने मौजूदा हालात के लिए अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों को जिम्मेदार ठहराया।
ईरान के इस रुख को कूटनीतिक संतुलन और रणनीतिक दबाव की नीति के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर वह वैश्विक व्यापार को पूरी तरह प्रभावित करने से बचना चाहता है, वहीं दूसरी ओर उसने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि विरोधी देशों के जहाजों को रोकने का अधिकार वह अपने पास सुरक्षित रखेगा।
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेताया था कि यदि होर्मुज का मार्ग पूरी तरह नहीं खोला गया तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, इस सख्त चेतावनी का भी ईरान की रणनीति पर कोई असर नहीं पड़ा है।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उछाल ला सकती है। मौजूदा तनाव के चलते पहले ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखने को मिल रही है।
ईरान के ताजा बयान से साफ है कि वह प्रत्यक्ष टकराव से बचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अपने विरोधियों के प्रति सख्ती बरतने से पीछे नहीं हटेगा। अमेरिका की सैन्य चेतावनी और ईरान की शर्तों के बीच खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि स्थिति कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ती है या टकराव और गहराता है।
