हल्द्वानी/रुद्रपुर। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती के दावों के बीच कुमाऊं मंडल से बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। यहां टैक्स चोरी अब छिपा हुआ खेल नहीं, बल्कि खुलेआम चल रहा एक संगठित सिंडिकेट बन चुका है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल में जिम्मेदार विभाग के कुछ कथित अधिकारी और कर्मचारी ही कटघरे में हैं, जिनकी मिलीभगत से सरकारी खजाने को रोजाना लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक रुद्रपुर, किच्छा, काशीपुर और हल्द्वानी जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में टैक्स चोरी का नेटवर्क पूरी तरह संगठित रूप ले चुका है। परचून, कपड़ा, जूता, कॉस्मेटिक और गुटखा जैसे सामान बिना बिल और बिना टैक्स के बड़े पैमाने पर ट्रकों के जरिए गोदामों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि ट्रांसपोर्ट कारोबार की आड़ में यह पूरा खेल संचालित हो रहा है। कथित ट्रांसपोर्ट एजेंट माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक “सेफ रूट” के जरिए पहुंचाते हैं, जहां चेकिंग का खतरा ना के बराबर होता है। आरोप यह है कि इन रूट्स और गतिविधियों की पूरी जानकारी जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को रहती है, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होती।
अंदरखाने चल रहे इस खेल का सबसे बड़ा पहलू “इन्फॉर्मेशन लीकेज” बताया जा रहा है। जैसे ही विभागीय टीम छापेमारी की तैयारी करती है, वैसे ही कथित तौर पर संबंधित कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों को पहले ही अलर्ट कर दिया जाता है। नतीजा—छापेमारी सिर्फ कागजों में रह जाती है और असली खेल पर्दे के पीछे चलता रहता है।
नाम न छापने की शर्त पर कुछ कारोबारियों ने खुलासा किया कि इस नेटवर्क में शामिल कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों और ट्रांसपोर्ट एजेंटों के बीच बाकायदा “मंथली सेटिंग” चलती है। हर महीने मोटी रकम के बदले आंखें मूंद ली जाती हैं, जिससे टैक्स चोरी का यह धंधा बिना किसी डर के फल-फूल रहा है।
इस पूरे मामले ने सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब सिस्टम की निगरानी करने वाले ही संदिग्ध भूमिका में नजर आएं, तो आम व्यापारी और जनता का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है।
यदि जल्द ही इस सिंडिकेट पर सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो न केवल सरकार की छवि को गहरा नुकसान होगा, बल्कि प्रदेश के राजस्व को होने वाला यह नुकसान आने वाले समय में और भयावह रूप ले सकता है।
