नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब खुले सैन्य टकराव में बदलता नजर आ रहा है। हालात को देखते हुए अमेरिका ने अपने कथित सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को और अधिक आक्रामक रूप देते हुए दुनिया के सबसे उन्नत विमानवाहक पोतों में शामिल USS Gerald R. Ford (CVN-78) को तैनात कर दिया है। इसके मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ने से क्षेत्र में रणनीतिक हलचल तेज हो गई है।
तैरता हुआ ‘जंगी शहर’
करीब 100,000 टन वजनी यह परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत अमेरिकी नौसेना की आधुनिक तकनीक का प्रतीक माना जाता है। यह 75 से अधिक अत्याधुनिक लड़ाकू और सहायक विमानों को संचालित करने में सक्षम है।
इसके एयर विंग में शामिल हैं: F-35C Lightning II – स्टील्थ तकनीक से लैस, दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम। F/A-18F Super Hornet – बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान, सटीक हमलों के लिए प्रसिद्ध। EA-18G Growler – इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और दुश्मन की संचार प्रणाली बाधित करने में माहिर। इन विमानों की मौजूदगी से क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
बहुस्तरीय सुरक्षा कवच
यह विमानवाहक पोत अकेला नहीं चलता। इसके साथ निर्देशित मिसाइलों से लैस विध्वंसक पोतों (डिस्ट्रॉयर) और अन्य सहयोगी युद्धपोतों का पूरा स्ट्राइक ग्रुप होता है, जो इसे हवाई, समुद्री और पनडुब्बी हमलों से सुरक्षा प्रदान करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तैनाती केवल सैन्य दबाव बढ़ाने का संकेत नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी है। हालांकि किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष की स्थिति में इसका असर सिर्फ संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
बढ़ी वैश्विक चिंता
मिडिल ईस्ट पहले से ही अस्थिर भू-राजनीतिक परिस्थितियों का सामना कर रहा है। ऐसे में उन्नत सैन्य संसाधनों की तैनाती ने वैश्विक समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। कूटनीतिक हलकों में अब यह चर्चा तेज है कि क्या तनाव वार्ता की मेज तक पहुंचेगा या फिर हालात और गंभीर मोड़ लेंगे।
फिलहाल, स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और दुनिया की निगाहें इस क्षेत्र में हो रहे हर रणनीतिक कदम पर टिकी हैं।
