तेहरान: पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने बड़ा रणनीतिक ऐलान किया है। ईरानी नौसेना ने स्पष्ट कहा है कि हालिया घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में जो बदलाव हुए हैं, वे अब वापस नहीं लिए जाएंगे खासतौर पर अमेरिका और इजराइल जैसे देशों के लिए।
ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, नौसेना ने कहा है कि क्षेत्र में “नई वास्तविकता” स्थापित हो चुकी है। इस नई स्थिति में वाशिंगटन के नेतृत्व वाली बाहरी शक्तियां अब ईरान के समुद्री क्षेत्र में अपनी शर्तें थोपने या मनमाना प्रभाव डालने की स्थिति में नहीं रहेंगी।
रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर यह रुख सामने रखा। ईरान फारस की खाड़ी में “स्वदेशी सुरक्षा व्यवस्था” लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य क्षेत्रीय देशों के सहयोग से सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाहरी हस्तक्षेप को खत्म करना है।
ईरान की इस रणनीति में नौसैनिक तैनाती बढ़ाना, अत्याधुनिक निगरानी सिस्टम विकसित करना और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना शामिल है। इसका लक्ष्य ईरानी जलक्षेत्र की सुरक्षा के साथ-साथ जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है।
यह बयान डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि ईरान होर्मुज को बंद रखता है, तो उसे “गंभीर परिणाम” भुगतने होंगे।
इसी बीच, ईरान समर्थित इराकी संगठन कताइब हिजबुल्लाह ने भी कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को जबरन खोलने की कोशिश की गई, तो क्षेत्र की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया जाएगा।
ईरान ने संकेत दिया है कि यह अहम समुद्री मार्ग फिलहाल खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगियों से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध जारी रह सकते हैं। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
