ICMR की बड़ी स्टडी से दूर हुई वैक्सीन को लेकर आशंका, कोविशील्ड-कोवैक्सिन से नहीं बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा

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नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बाद से कोरोना वैक्सीन को लेकर उठ रहे सवालों और हार्ट अटैक के मामलों को लेकर फैली आशंकाओं के बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की देशव्यापी स्टडी ने बड़ी राहत देने वाला निष्कर्ष सामने रखा है। अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि कोविशील्ड (Covishield) या कोवैक्सिन (Covaxin) लगवाने से वयस्कों में हार्ट अटैक या खून के थक्के (थ्रोम्बोटिक इवेंट्स) बनने का खतरा नहीं बढ़ता। विशेषज्ञों के अनुसार, हृदय संबंधी गंभीर घटनाओं के पीछे धूम्रपान, पहले से मौजूद बीमारियां और खराब जीवनशैली जैसे पारंपरिक जोखिम कारक अधिक जिम्मेदार हैं।

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आईसीएमआर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (NIE) द्वारा किए गए इस अध्ययन में देश के 25 प्रमुख अस्पतालों को शामिल किया गया। इसमें क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) लुधियाना और पीजीआईएमईआर के विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। शोध 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों पर केंद्रित था, क्योंकि महामारी के बाद युवाओं में हार्ट अटैक और ब्लड क्लॉटिंग को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं।

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अध्ययन के दौरान अक्टूबर 2021 से जनवरी 2023 के बीच अस्पतालों में भर्ती हुए सैकड़ों मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। जांच में पाया गया कि जिन लोगों ने कोरोना वैक्सीन की दो या उससे अधिक डोज ली थीं, उनमें हार्ट अटैक का जोखिम नहीं बढ़ा। कोविशील्ड और कोवैक्सिन दोनों के अलग-अलग विश्लेषण में भी यही निष्कर्ष सामने आए।

शोधकर्ताओं ने पाया कि हार्ट अटैक और ब्लड क्लॉटिंग की घटनाओं का प्रमुख कारण धूम्रपान, पहले से मौजूद गंभीर बीमारियां, परिवार में क्लॉटिंग डिसऑर्डर का इतिहास और गंभीर कोरोना संक्रमण हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैक्सीन लेने वाले लोगों में इन समस्याओं का कोई अतिरिक्त जोखिम नहीं देखा गया।

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आईसीएमआर ने स्वास्थ्य विभागों को सलाह दी है कि वैक्सीन को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के साथ-साथ लोगों को धूम्रपान छोड़ने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, पुरानी बीमारियों को नियंत्रित रखने और गंभीर कोरोना संक्रमण से उबर चुके मरीजों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी के प्रति जागरूक किया जाए।

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