तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने गुरुवार को खाड़ी क्षेत्र के अरब देशों के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तेज कर दिए, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ने लगा है। इन हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो हाल के समय में बड़ा उछाल माना जा रहा है।
ईरान ने लाल सागर में सऊदी अरब की यनबू स्थित सैमरेफ रिफाइनरी को निशाना बनाया, जहां ड्रोन हमले के बाद आग लग गई। वहीं कतर की रास लाफन एलएनजी सुविधा पर मिसाइल हमले से भारी नुकसान हुआ है। कुवैत की मीना अल-अहमदी और मीना अब्दुल्ला रिफाइनरियों में भी आग लगने की खबर है, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है।
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास एक जहाज में आग लगने और कतर के निकट एक अन्य पोत के क्षतिग्रस्त होने से समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता खतरा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से गुजरता है।
तनाव की जड़ इस्राइल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर किया गया हमला माना जा रहा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार है, जिसे कतर के साथ साझा किया जाता है। इस हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी।
उधर, सऊदी अरब ने अपने हवाई क्षेत्र में कई ईरानी ड्रोन मार गिराने का दावा किया है, जबकि इस्राइल में मिसाइल हमलों के चलते लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने चेतावनी दी है कि इस टकराव के परिणाम पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर के ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रहने पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
युद्ध के तीसरे सप्ताह में मानवीय संकट भी गहराता जा रहा है। ईरान में 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। इस्राइल में भी हमलों के चलते जनहानि हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो दुनिया को ऊर्जा संकट, महंगाई और आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
