देहरादून: देहरादून में हाल ही में हुई कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटना पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मसूरी क्षेत्र-3 के उप आबकारी निरीक्षक सोबन सिंह उप और कुठालगेट चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक अशोक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अहम कदम माना जा रहा है।
सीएम धामी ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से व्यापक चेकिंग अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों, हुड़दंगियों और अवांछित तत्वों के खिलाफ सघन अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से रोड रेज, फायरिंग और देर रात तक चलने वाली अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम जनता की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए पुलिस एवं प्रशासन को पूरी मुस्तैदी और सख्ती के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने दो टूक कहा कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
उधर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में गृह एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर देहरादून में बढ़ती रोड रेज और हुड़दंग की घटनाओं पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पुलिस गश्त बढ़ाने, खासकर पीक ऑवर में सख्त निगरानी रखने और डे-नाइट के साथ मॉर्निंग पेट्रोलिंग को भी प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने बार और रेस्टोरेंट के निर्धारित समय का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने चेताया कि सप्ताहांत में देहरादून को हुड़दंगियों का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले बार संचालकों और अवैध रूप से संचालित प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही शहर के आसपास संचालित होम स्टे की मैपिंग कर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पर्यटन के नाम पर किसी प्रकार की अवैध गतिविधि न हो सके। किरायेदारों और पीजी में रहने वाले लोगों का सत्यापन अभियान भी तेज करने को कहा गया है।
सरकार के इस सख्त रुख से साफ है कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था को लेकर अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई का सिलसिला जारी रहेगा।
