Haldwani: गुटखा-पान मसाला का काला खेल!…ट्रांसपोर्ट नगर के गोदामों में टैक्स चोरी का माल, बाजार में मनमानी कीमतें

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हल्द्वानी। कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों का बड़ा काला खेल सामने आ रहा है। इन उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी लागू होने के बाद कुछ कथित कारोबारियों ने टैक्स चोरी कर बड़े पैमाने पर जमाखोरी और कालाबाजारी शुरू कर दी है। इस अवैध धंधे के कारण सरकार को रोजाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई फिलहाल नदारद दिखाई दे रही है।

सूत्रों के अनुसार बाहरी राज्यों से गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की खेप टैक्स चोरी कर बंद बॉडी वाहनों के जरिए लगातार हल्द्वानी पहुंचाई जा रही है। बताया जा रहा है कि शहर के ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में कुछ कथित कारोबारी और ट्रांसपोर्टर इस पूरे खेल के केंद्र में हैं, जिन्होंने अपने-अपने गोदामों को अवैध स्टॉक का अड्डा बना रखा है।

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जानकारी के मुताबिक रात के अंधेरे में बाहरी राज्यों से आने वाले बंद बॉडी वाहनों से टैक्स चोरी का माल सीधे गोदामों में उतार लिया जाता है। ताकि यह गतिविधि किसी की नजर में न आए और बिना किसी रोक-टोक के अवैध स्टॉक जमा किया जा सके।

सूत्र बताते हैं कि जिन गोदामों में यह माल रखा गया है, उनके शटर दिनभर बंद रहते हैं और ताले लटके दिखाई देते हैं। कथित कारोबारी और ट्रांसपोर्टर दिन के समय गोदामों से गायब रहते हैं। जब बाजार में माल सप्लाई करना होता है, तभी शटर खोलकर थोक व्यापारियों को माल पहुंचाया जाता है। इस तरीके से वे प्रशासनिक छापेमारी से भी आसानी से बच निकलते हैं।

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बताया जा रहा है कि जीएसटी की नई दरें लागू होने से पहले ही कई थोक व्यापारियों ने गुटखा और पान मसाला का भारी स्टॉक जमा कर लिया था। अब उसी पुराने माल को नई दरों का बहाना बनाकर बाजार में मनमाने दामों पर बेचा जा रहा है।

बाजार में हालात यह हैं कि पांच रुपये एमआरपी वाला गुटखा 6 से 7 रुपये तक बेचा जा रहा है, जबकि 17 रुपये वाला पैकेट 25 रुपये तक पहुंच गया है। कई जगह गुटखा और सिगरेट के पैकेट एमआरपी से कहीं अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं।

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थोक व्यापारी और रिटेलर पुराने स्टॉक, जिस पर पुरानी एमआरपी अंकित है, उसे भी नई 40 प्रतिशत जीएसटी दरों का हवाला देकर महंगे दामों पर बेच रहे हैं। फुटकर दुकानदारों को थोक बाजार से ही माल महंगे दामों पर मिल रहा है, जिसके चलते उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि खुलेआम चल रहे इस पूरे खेल के बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन अब तक क्यों खामोश हैं। अगर समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो टैक्स चोरी, जमाखोरी और कालाबाजारी का यह नेटवर्क और भी मजबूत हो सकता है।