ईरान पर अमेरिकी हमले तेज: ‘युद्ध कब खत्म होगा, फैसला ट्रंप करेंगे’, डिफेंस सेक्रेटरी हेगसेथ का बड़ा बयान

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वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर जारी सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने स्पष्ट किया है कि इस संघर्ष के खत्म होने का कोई तय समय नहीं है। उन्होंने कहा कि युद्ध कब समाप्त होगा, इसका अंतिम निर्णय केवल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही करेंगे।

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान हेगसेथ ने संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार शहीद सैनिकों के बलिदान का पूरा सम्मान करेगी और इस मिशन को अधूरा नहीं छोड़ा जाएगा।

हेगसेथ ने कहा, “हम कोई निश्चित टाइम फ्रेम तय नहीं करना चाहते। हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और जब हमारा मिशन पूरा हो जाएगा, तब राष्ट्रपति ट्रंप यह तय करेंगे कि आगे क्या करना है।” उन्होंने बताया कि डोवर एयर फोर्स बेस पर जब शहीद सैनिकों के पार्थिव शरीर पहुंचे, तो परिजनों ने सरकार से अपील की कि इस लड़ाई को अधूरा न छोड़ा जाए।

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अमेरिकी रक्षा मंत्री ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने उन छह अमेरिकी सैनिकों के परिवारों से मुलाकात की, जिनकी मौत इराक के ऊपर एक सैन्य रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटना में हुई थी। उन्होंने कहा कि इन परिवारों ने भी मिशन को अंत तक जारी रखने की मांग की है।

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ईरान की सैन्य क्षमता पर टिप्पणी करते हुए हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने अब तक 7,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है। उनके अनुसार, इन हमलों से ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान की नई मिसाइल विकसित करने की क्षमता में करीब 90 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि कामिकाजे ड्रोन की संख्या भी काफी कम हो गई है।

हेगसेथ ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की एयर डिफेंस प्रणाली को “पूरी तरह ध्वस्त” कर दिया है और अब अमेरिकी सैन्य बढ़त लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने ईरान की रणनीति की तुलना हमास से करते हुए कहा कि सुरंगों, मिसाइलों और ड्रोन के जरिए युद्ध लड़ने की रणनीति को अमेरिकी सेना प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर रही है।

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अमेरिका के इन दावों के बीच मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता के साथ-साथ वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।