नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के चौथे दिन मुख्य संबोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मानव इतिहास का परिवर्तनकारी क्षण बताया। उन्होंने कहा कि एआई मानव क्षमता को कई गुना बढ़ाने की ताकत रखता है और यह तकनीकी बदलाव पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेज गति से हो रहा है।
“टेक्नोलॉजी बदलाव अब दशकों में नहीं, पलों में”
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले नई तकनीक को परिपक्व होने में दशकों का समय लगता था, लेकिन एआई के साथ परिवर्तन की रफ्तार बेहद तेज है।
उन्होंने कहा, “मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन तक का सफर तेज भी है, गहरा भी है और व्यापक भी है। हमें अपना विजन भी बड़ा रखना है और जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी निभानी है।”पीएम मोदी ने भविष्य की पीढ़ियों की चिंता करते हुए कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि भविष्य में एआई क्या कर सकती है, बल्कि यह है कि हम वर्तमान में एआई के साथ क्या करते हैं और आने वाली पीढ़ियों को इसका कैसा स्वरूप सौंपते हैं।
“AI हो मानव-केंद्रित, न कि सिर्फ मशीन-केंद्रित”
समिट की थीम ‘सर्वजन हिताय – सर्वजन सुखाय’ का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एआई को मानव-केंद्रित, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने के पक्ष में है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इंसान केवल डेटा प्वाइंट या रॉ मटेरियल बनकर न रह जाए। एआई का लोकतंत्रीकरण जरूरी है, ताकि यह ग्लोबल साउथ के देशों में समावेशन और सशक्तिकरण का माध्यम बन सके।
ओपन कोड की वकालत
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान में कई बड़ी कंपनियां एआई को रणनीतिक संपत्ति मानती हैं और उसके कोड को गोपनीय रखती हैं। लेकिन भारत का मानना है कि एआई का उपयोग तभी वैश्विक भलाई के लिए संभव है, जब इसके कोड अधिक पारदर्शी और सार्वजनिक होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई को मानवता के हित में विकसित और संचालित करना ही समय की मांग है।
